उन्होंने आगे कहा- “प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2022 में भारत 6G एलायंस की स्थापना की गई, जिसने भारत के 6G विज़न को प्रस्तुत किया। हमारा लक्ष्य स्पष्ट है—6G के विकास के साथ वैश्विक मानकों और पेटेंट में कम-से-कम 10 प्रतिशत योगदान देना।”
टीईसी ने अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया जिसमे वैश्विक विशेषज्ञ, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, शिक्षाविद् और नीति-निर्माता 6G Ecosystem पर चर्चा के लिए एकत्र हुए।
कार्यशाला ने ITU और 3GPP जैसे अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण निकायों में सक्रिय भागीदारी के माध्यम से वैश्विक 6G मानकीकरण प्रयासों में भारत की भूमिका को सुदृढ़ करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
AI, स्पेक्ट्रम योजना, नेटवर्क आर्किटेक्चर और उभरते अनुप्रयोगों को भविष्य के 6G Systems के प्रमुख स्तंभों के रूप में चिन्हित किया गया ।
कार्यशाला में भारतीय शोधकर्ताओं, स्टार्ट-अप्स और तकनीकी नवोन्मेषकों के लिए वैश्विक 6G अनुसंधान और मानकीकरण Ecosystem में सक्रिय भागीदारी के अवसरों पर प्रकाश डाला गया ।
प्रविष्टि तिथि: 18 MAR 2026 6:05PM by PIB Delhi
संचार तथा पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री, श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने आज भविष्य की वैश्विक दूरसंचार संरचना के निर्माण में भारत की सार्थक भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा-“इस दिशा में आगे बढ़ते हुए हमारी भूमिका चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित होनी चाहिए। पहला, वैश्विक इंटरऑपरेबिलिटी सुनिश्चित करना—उपकरणों, नेटवर्क और सेवाओं के बीच—ताकि एकीकृत Ecosystem में विश्व सहज रूप से संचार कर सके।
दूसरा, 3GPP और ITU जैसे वैश्विक निकायों के सहयोग से एक साझा तकनीकी ढांचा विकसित करना, जिससे रेडियो इंटरफेस, कोर नेटवर्क, स्पेक्ट्रम और सेवा संरचना के लिए समान मानक स्थापित किए जा सकें।
तीसरा, नवाचार और अनुसंधान को गति देना, जहाँ स्पष्ट वैश्विक मानक शोधकर्ताओं, स्टार्ट-अप्स और उद्योग को नवाचारों को व्यावहारिक समाधान में बदलने के लिए मार्गदर्शन प्रदान करें।
चौथा और सबसे महत्वपूर्ण, समावेशी विकास और स्वदेशी नवाचार सुनिश्चित करना। खुले मानक एक समान अवसर प्रदान करते हैं, जिससे देश योगदान कर सकें, बौद्धिक संपदा का निर्माण कर सकें और यह सुनिश्चित किया जा सके कि प्रौद्योगिकी के लाभ विश्व के प्रत्येक नागरिक तक पहुँचें। इन स्तंभों को साकार करने के लिए निरंतर अंतरराष्ट्रीय सहयोग, वैश्विक संवाद और सतत सहभागिता आवश्यक है।”


केंद्रीय मंत्री श्री सिंधिया विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयोजित 6G मानकीकरण पर अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। मंच पर अन्य गणमान्य व्यक्तियों में डीसीसी के अध्यक्ष एवं दूरसंचार सचिव श्री अमित अग्रवाल, सदस्य (वित्त) श्री मनीष सिन्हा, सदस्य (प्रौद्योगिकी) श्री रुद्र नारायण पलई तथा सदस्य (सेवाएं) श्री देब कुमार चक्रवर्ती उपस्थित थे। यह कार्यशाला दूरसंचार विभाग (DoT) के तकनीकी अंग, दूरसंचार अभियांत्रिकी केंद्र (TEC) द्वारा आयोजित की गई। इस कार्यक्रम में सरकार, शिक्षाविदों, उद्योग और अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण निकायों के प्रमुख विशेषज्ञों ने भाग लिया और छठी पीढ़ी की दूरसंचार प्रौद्योगिकियों के विकसित होते वैश्विक रोडमैप पर विचार-विमर्श किया।



यह कार्यशाला 6G अनुसंधान, स्पेक्ट्रम योजना, नेटवर्क आर्किटेक्चर, AI आधारित नेटवर्क और उभरते अनुप्रयोगों में वैश्विक प्रगति की समीक्षा करने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय मानक विकास प्रक्रियाओं में भारत की भागीदारी को सुदृढ़ करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुई।
श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने कहा- “प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2022 में भारत 6G एलायंस की स्थापना की गई, जिसने भारत के 6G Vision को प्रस्तुत किया। हमारा लक्ष्य स्पष्ट है—6G के विकास के साथ वैश्विक मानकों और पेटेंट में कम–से–कम 10 प्रतिशत योगदान देना।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि “6G की संभावनाएँ केवल तकनीकी प्रगति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अवसरों के लोकतंत्रीकरण में भी निहित हैं। यही वह क्षेत्र है जहाँ वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका प्रमुखता से उभरती है।” अपने संबोधन का समापन करते हुए उन्होंने कहा, “आइए हम आज एक सुरक्षित, सुदृढ़ और वास्तव में वैश्विक 6G Ecosystem के निर्माण का संकल्प लें—जो केवल उपकरणों को ही नहीं, बल्कि लोगों, अवसरों और संभावनाओं को भी दुनिया भर में जोड़े।”
इससे पूर्व, प्रतिभागियों और गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत करते हुए दूरसंचार विभाग के सलाहकार (प्रौद्योगिकी) श्री शुभेंदु तिवारी ने वैश्विक मानकीकरण प्रयासों में प्रारंभिक भागीदारी के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार मानकीकरण में भारत की बढ़ती भागीदारी देश की तकनीकी क्षमता और नवाचार क्षमता को प्रदर्शित करती है।
तकनीकी सत्र
कार्यशाला में कई तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें 6G Ecosystem के प्रमुख आयामों—वैश्विक मानकीकरण प्रयास, नेटवर्क आर्किटेक्चर, स्पेक्ट्रम योजना, AI, सुरक्षा ढांचा और उभरते अनुप्रयोग—पर विस्तृत चर्चा की गई।
वैश्विक मानकीकरण रोडमैप पर सत्र में अंतरराष्ट्रीय मंचों जैसे इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन यूनियन रेडियो कम्युनिकेशन सेक्टर (ITU-R) और 3rd जेनरेशन पार्टनरशिप प्रोजेक्ट (3GPP) में चल रहे कार्यों का अवलोकन प्रस्तुत किया गया, जिसमें IMT-2030 के विकास की दिशा में प्रमुख मील के पत्थरों और प्रारंभिक चरणों में वैश्विक समन्वय के महत्व को रेखांकित किया गया।
6G नेटवर्क आर्किटेक्चर पर चर्चा में रेडियो एक्सेस और कोर नेटवर्क के क्लाउड-नेटिव, सेवा-आधारित और प्रोग्रामेबल ढाँचों की ओर विकास पर ध्यान केंद्रित किया गया, जो अगली पीढ़ी की डिजिटल सेवाओं को समर्थन देने में सक्षम होंगे।
6G के लिए स्पेक्ट्रम रोडमैप सत्र में भविष्य की स्पेक्ट्रम आवश्यकताओं, वैश्विक सामंजस्य प्रयासों और ट्रैफिक प्रक्षेपणों का विश्लेषण किया गया, साथ ही बढ़ती कनेक्टिविटी मांगों को पूरा करने के लिए स्पेक्ट्रम के कुशल उपयोग के महत्व पर बल दिया गया।
भारत के 2030 रोडमैप पर एक विशेष सत्र में Pre-6G अनुसंधान पहलों और पायलट परियोजनाओं को भविष्य के व्यावसायिक कार्यान्वयन में परिवर्तित करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया, जिसके लिए सरकार, शिक्षाविदों और उद्योग के बीच सहयोग आवश्यक है।
रेडियो एक्सेस नेटवर्क (RAN) के विकास पर सत्रों में वर्चुअलाइज्ड और ओपन RAN जैसी उभरती संरचनाओं और उनकी भूमिका पर चर्चा की गई, जो लचीले और विस्तार योग्य नेटवर्क के निर्माण में सहायक होंगी।
भविष्य के नेटवर्क में इंटेलिजेंस पर चर्चा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग की भूमिका पर प्रकाश डाला गया, जो अनुकूलनशील, स्वायत्त और स्व-उन्नत नेटवर्क संचालन को सक्षम बनाती हैं।
6G के लिए सुरक्षा और ट्रस्ट आर्किटेक्चर पर सत्र में भविष्य की संचार प्रणालियों के लिए सुदृढ़ और सुरक्षित ढाँचों के महत्व को रेखांकित किया गया।
प्रतिभागियों ने उभरते 6G अनुप्रयोगों पर भी चर्चा की, जिनमें इमर्सिव संचार से आगे के उपयोग मामलों के साथ-साथ स्थलीय और गैर-स्थलीय नेटवर्क के एकीकरण के माध्यम से निर्बाध और सर्वव्यापी कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने पर विचार किया गया।
पृष्ठभूमि
मोबाइल संचार की प्रत्येक पीढ़ी ने वैश्विक डिजिटल परिदृश्य को महत्वपूर्ण रूप से परिवर्तित किया है। जहाँ 4G ने पूर्णतः मोबाइल ब्रॉडबैंड को सक्षम बनाया, वहीं 5G ने अल्ट्रा-विश्वसनीय कम विलंबता संचार और बड़े पैमाने पर मशीन-टाइप कनेक्टिविटी को समर्थन देकर उद्योग और समाज में नए अनुप्रयोगों को संभव बनाया।
5G के वाणिज्यिक विस्तार ने 6G की प्रौद्योगिकियों के लिए वैश्विक अनुसंधान और मानकीकरण गतिविधियों को गति दी है। IMT-2030 के ढांचे के अंतर्गत विकसित होने की अपेक्षा के साथ, 6G का उद्देश्य सर्वव्यापी बुद्धिमान कनेक्टिविटी, एकीकृत सेंसिंग और संचार प्रणाली, AI-आधारित नेटवर्क और सतत दूरसंचार पारिस्थितिकी तंत्र को सक्षम बनाना है।
IMT-2030 के लिए दृष्टि और प्रौद्योगिकी प्रवृत्तियों को ITU-R की सिफारिश M.2516 में रेखांकित किया गया है। IMT-2030 के लिए तकनीकी प्रदर्शन आवश्यकताओं (TPR) को भी वर्किंग पार्टी 5D के अंतर्गत अंतिम रूप दिया गया है, जो भविष्य की मोबाइल प्रणालियों के लिए प्रमुख मानक निर्धारित करते हैं।
इन प्रदर्शन लक्ष्यों को व्यावहारिक प्रौद्योगिकियों में परिवर्तित करने के लिए 3GPP ने Release-20 के अंतर्गत अन्वेषण अध्ययन शुरू किए हैं, जिनका उद्देश्य 5G-एडवांस्ड से आगे की प्रमुख तकनीकी क्षमताओं और आर्किटेक्चर की दिशा की पहचान करना है। ये अध्ययन आगे चलकर विस्तृत तकनीकी विनिर्देशों में विकसित होंगे, जो उपकरण निर्माण और वैश्विक दूरसंचार परिचालकों द्वारा वाणिज्यिक कार्यान्वयन का मार्गदर्शन करेंगे।
ITU-R और 3GPP के साथ-साथ, कई अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण संगठन और उद्योग गठबंधन भविष्य के 6G तंत्र के विभिन्न पहलुओं—स्पेक्ट्रम योजना, नेटवर्क आर्किटेक्चर, AI एकीकरण और उभरते अनुप्रयोग—का अध्ययन कर रहे हैं। इन प्रयासों में भारत की सक्रिय भागीदारी वैश्विक दूरसंचार के भविष्य के स्वरूप को निर्धारित करने में उसकी भूमिका को और सशक्त बनाएगी।
