बजट सत्र में आएगा आईबीसी संशोधन विधेयक, आईडीबीआई विनिवेश जल्द: वित्त मंत्री

बजट सत्र में आएगा आईबीसी संशोधन विधेयक, आईडीबीआई विनिवेश जल्द: वित्त मंत्री

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को संकेत दिया कि आईडीबीआई बैंक का विनिवेश प्रक्रिया जल्द पूरी हो सकती है। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि सरकार बजट सत्र के दूसरे चरण में दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) संशोधन विधेयक पेश करेगी।

9 मार्च से शुरू होगा बजट सत्र का दूसरा चरण

वित्त मंत्री ने बताया कि संसद के बजट सत्र का दूसरा भाग 9 मार्च से शुरू होगा, जिसमें सरकार आर्थिक सुधारों से जुड़े अहम विधेयकों को आगे बढ़ाने की तैयारी में है।

विनिवेश की गति और दिशा पर सरकार का फोकस

केंद्रीय बजट 2026-27 के बाद आयोजित प्रेस वार्ता में वित्त मंत्री ने कहा कि विनिवेश की गति और दिशा से आने वाले वर्षों में राजस्व सृजन का मजबूत आधार तैयार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि आगे चलकर विनिवेश की प्रक्रिया और तेज होगी, विशेष रूप से सार्वजनिक क्षेत्र के केंद्रीय उद्यमों (सीपीएसई) के विनिवेश पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।

टैक्स आधार बढ़ाने पर जोर

वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि सरकार देश के टैक्स आधार को बढ़ाने के लिए लगातार काम कर रही है, जिससे प्रत्यक्ष कर संग्रह में आने वाले समय में और वृद्धि होगी।

आईडीबीआई बैंक विनिवेश ट्रैक पर

उन्होंने स्पष्ट किया कि आईडीबीआई बैंक का विनिवेश ट्रैक पर है और यह प्रक्रिया जल्द पूरी होने की संभावना है।

परिसंपत्ति मुद्रीकरण जारी रहेगा

वित्त मंत्री ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि विनिवेश और परिसंपत्ति मुद्रीकरण की गति आगे भी जारी रहेगी। इससे सीपीएसई का फ्री-फ्लोट बढ़ेगा। उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले महीनों में निजी उपभोग का स्तर ऊंचा बना रहेगा और वित्त वर्ष 2027 के लिए घाटे का लक्ष्य यह दर्शाता है कि सरकार की प्राथमिकता विकास है।

80,000 करोड़ रुपए की विविध पूंजीगत प्राप्तियों का अनुमान

बजट में विविध पूंजीगत प्राप्तियों से 80,000 करोड़ रुपए के राजस्व का अनुमान लगाया गया है, जो वित्त वर्ष 2026 के संशोधित अनुमान से 33,837 करोड़ रुपए अधिक है। इसमें सरकारी परिसंपत्तियों की बिक्री और मुद्रीकरण से होने वाली आय शामिल है।

पूंजीगत व्यय बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपए

वित्त मंत्री ने 2026-27 के बजट में 12.2 लाख करोड़ रुपए के पूंजीगत व्यय की घोषणा की है। इसका उद्देश्य अर्थव्यवस्था में विकास और रोजगार को बढ़ावा देने के लिए बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को गति देना है। यह राशि पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 2.2 लाख करोड़ रुपए अधिक है।

ऋण-जीडीपी अनुपात में गिरावट का अनुमान

बजट के अनुसार, 2026-27 में ऋण-से-जीडीपी अनुपात घटकर जीडीपी का 55.6% (बजट अनुमान) रहने का अनुमान है, जबकि 2025-26 में यह 56.1% (संशोधित अनुमान) था। (इनपुट-आईएएनएस)