
तेजी से बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच भारत अब अंतरराष्ट्रीय व्यापार और कूटनीति के केंद्र में उभर चुका है। दुनिया के कई देश भारत को एक बड़े अवसर के रूप में देख रहे हैं। इसी क्रम में चीन के रुख में भी बदलाव नजर आने लगा है। भारत में चीन के राजदूत शू फेइहोंग ने कहा है कि भारत और चीन के संबंध सुधार के एक नए स्तर पर पहुंच रहे हैं।
शी-मोदी मुलाकात को बताया टर्निंग प्वाइंट
चीनी राजदूत ने कहा कि पिछले अगस्त में तियानजिन में राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई बैठक दोनों देशों के संबंधों के लिए एक अहम मोड़ साबित हुई। उनके अनुसार यह मुलाकात संबंधों को “रीसेट” करने और नई शुरुआत के साथ आगे बढ़ने की दिशा में निर्णायक रही।
हवाई सेवाएं और तीर्थ यात्रा बहाल
गलवान घाटी विवाद के बाद लंबे समय तक जमे रिश्तों में अब धीरे-धीरे नरमी दिखाई दे रही है। दोनों देशों के बीच वर्षों बाद डायरेक्ट हवाई सेवाएं फिर से शुरू हुई हैं। इसके साथ ही कैलाश मानसरोवर यात्रा भी दोबारा शुरू कर दी गई है। भारत ने चीनी नागरिकों को टूरिस्ट वीजा जारी करना फिर से शुरू किया है, जिससे यात्रा और संवाद आसान हुआ है।
व्यापार और आर्थिक सहयोग में तेजी
राजदूत शू ने बताया कि भारत और चीन के बीच व्यापार बढ़कर 155.6 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है, जो साल-दर-साल 12% से अधिक की वृद्धि को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि चीन को भारत का निर्यात 9.7% बढ़ा है। इसे उन्होंने दो बड़ी एशियाई अर्थव्यवस्थाओं के बीच आर्थिक सहयोग की अपार संभावनाओं का संकेत बताया।
लोगों के बीच संपर्क बढ़ा
नई दिल्ली में ‘ईयर ऑफ द हॉर्स’ के अवसर पर आयोजित चीनी न्यू ईयर कार्यक्रम में बोलते हुए राजदूत शू ने कहा, “सभी स्तरों पर लेन-देन बढ़ा है। आर्थिक और व्यापारिक सहयोग नई ऊंचाइयों पर पहुंचा है और लोगों के बीच संपर्क पहले से कहीं अधिक सक्रिय हुआ है।”
‘वसुधैव कुटुम्बकम’ और चीनी वैश्विक दृष्टिकोण
उन्होंने कहा कि चीन का वैश्विक सहयोग का नजरिया भारत की ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ यानी ‘दुनिया एक परिवार’ की अवधारणा से मेल खाता है। दोनों देश मिलकर क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता में योगदान दे सकते हैं।
गणतंत्र दिवस पर शी जिनपिंग का संदेश
भारत के 77वें गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को बधाई संदेश भेजा था। इस अवसर पर राजदूत शू ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि ड्रैगन और हाथी का साथ-साथ नृत्य करना ही भारत-चीन के लिए सही विकल्प है। उन्होंने गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल होने पर खुशी भी जताई।
भविष्य में सहयोग के नए अवसर
राजदूत शू ने कहा कि चीन की 15वीं पंचवर्षीय योजना के तहत उच्चस्तरीय वैज्ञानिक-तकनीकी आत्मनिर्भरता, वास्तविक अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और खुलेपन को बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। इससे भारत सहित अन्य देशों के साथ सहयोग के नए अवसर पैदा होंगे। उन्होंने ‘मेक इन इंडिया’ जैसी पहलों का जिक्र करते हुए कहा कि चीन भारत के साथ व्यावहारिक सहयोग को और गहरा करने के लिए तैयार है। (इनपुट: आईएएनएस)
