
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता की मांग को लेकर दुनिया के कई देशों ने समर्थन जताया है। इन देशों में चिली भी शामिल है। इस बीच भारत और चिली एक व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) के अंतिम चरण में हैं। इसी संदर्भ में भारत में चिली के राजदूत जुआन अंगुलो ने एक विशेष बातचीत में दोनों देशों के संबंधों, बहुपक्षवाद और संयुक्त राष्ट्र की भूमिका पर अपने विचार साझा किए।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की भूमिका बढ़ती हुई
भारत में चिली के राजदूत जुआन अंगुलो ने कहा कि भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत आवाज बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा, “हमें लगता है कि भारत जैसे देशों की अंतरराष्ट्रीय मंच पर उपस्थिति और आवाज जरूरी है। भारत एक तेजी से बढ़ता हुआ देश है, ग्लोबल साउथ का अहम हिस्सा है और आज उसके विचारों का वैश्विक महत्व लगातार बढ़ रहा है।”
जी20 में भारत के नेतृत्व की अहम भूमिका
राजदूत अंगुलो ने भारत के जी20 नेतृत्व की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय नेताओं का भारत आना और जी20 में भारत की सक्रिय भूमिका इस बात का प्रमाण है कि वैश्विक मामलों में भारत का नेतृत्व अब पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गया है।
भारत-चिली रिश्तों को मजबूत करने पर जोर
भारत और चिली के द्विपक्षीय संबंधों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि दोनों देश कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया, “कमर्शियल क्षेत्र में एसआईपीए महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके अलावा कृषि जैसे क्षेत्रों में भी हमारा सहयोग है। कुछ वर्ष पहले कृषि क्षेत्र में एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए थे, जिससे संवाद, सूचना साझा करने और तकनीक ट्रांसफर के नए रास्ते खुले हैं।”
संयुक्त राष्ट्र की भूमिका को बताया अहम
संयुक्त राष्ट्र की प्रासंगिकता पर बात करते हुए चिली के राजदूत ने कहा कि यूएन को निरर्थक नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा, “संयुक्त राष्ट्र के पास करने के लिए बहुत काम है। यह जरूरी है कि अंतरराष्ट्रीय संगठन दुनिया भर में शांति और समृद्धि बनाए रखने में अपनी भूमिका निभाएं।”
यूएन सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन
भारत की स्थायी सदस्यता को लेकर चिली के समर्थन को दोहराते हुए राजदूत अंगुलो ने कहा कि उनका देश भारत की इस आकांक्षा के साथ खड़ा है। उन्होंने कहा, “भारत की सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य बनने की इच्छा है और चिली ने इसमें भारत का समर्थन करने की इच्छा जताई है। हम मानते हैं कि बहुपक्षवाद बेहद जरूरी है। एक छोटे देश के रूप में हमारा विश्वास है कि बहुपक्षवाद ही आज की कई वैश्विक चुनौतियों से निपटने का सबसे प्रभावी तरीका है।”
भारत-चिली सीईपीए पर बातचीत अंतिम चरण में
व्यापार और निवेश पर बात करते हुए चिली के राजदूत ने कहा कि भारत और चिली के बीच व्यापार की संभावनाएं काफी मजबूत हैं। उन्होंने बताया कि मई से भारत और चिली के बीच कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (सीईपीए) पर बातचीत शुरू हो चुकी है।
राष्ट्रपति बोरिक के भारत दौरे के बाद मिली गति
राजदूत अंगुलो ने कहा कि अप्रैल में चिली के राष्ट्रपति गैब्रियल बोरिक के भारत दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई बैठक में इस समझौते पर बातचीत शुरू करने का फैसला लिया गया था। उन्होंने बताया कि मई में टर्म्स ऑफ रेफरेंस पर हस्ताक्षर हुए और इसके दो सप्ताह बाद सैंटियागो में बातचीत का पहला दौर सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
