
मध्य प्रदेश के धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों पर विभिन्न ‘लोक’ विकसित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा है कि ये लोक केवल ईंट-पत्थरों के निर्माण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि राज्य के विकास के नए ग्रोथ इंजन के रूप में उभर रहे हैं।
पर्यटन और रोजगार को मिलेगा नया आयाम
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में निर्मित हो रहे धार्मिक और सांस्कृतिक लोक सिर्फ निर्माण परियोजनाएं नहीं हैं, बल्कि ये मध्य प्रदेश के विकास को नई दिशा देने वाले केंद्र बनेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ विजन को आत्मसात करते हुए ये स्थल भविष्य में पर्यटन के वैश्विक केंद्रों के रूप में स्थापित होंगे, जिससे स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
हर वर्ग के लिए आर्थिक समृद्धि का द्वार
सीएम मोहन यादव ने कहा, “हस्तशिल्पियों से लेकर सेवा क्षेत्र तक, इन लोकों का विकास समाज के हर वर्ग के लिए आर्थिक समृद्धि का नया द्वार खोलेगा। आस्था का यह महायज्ञ जहां एक ओर हमारी सांस्कृतिक जड़ों को सींच रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रदेश को आधुनिकता और आत्मनिर्भरता के पथ पर तेजी से आगे बढ़ा रहा है।”
‘विकास भी, विरासत भी’ के मंत्र पर आगे बढ़ता मध्य प्रदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकास भी, विरासत भी’ को ध्येय वाक्य मानते हुए मध्य प्रदेश अपनी सांस्कृतिक पहचान को सहेजने के लिए जन-अभियान चला रहा है। प्रदेश में करीब 900 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से 20 लोकों का निर्माण किया जा रहा है।
प्रदेश में बन रहे प्रमुख धार्मिक-सांस्कृतिक लोक
उज्जैन में महाकाल लोक का निर्माण हो चुका है। सागर में संत रविदास लोक 101 करोड़ रुपए की लागत से तैयार किया जा रहा है, जिसे सामाजिक समरसता का प्रतीक माना जा रहा है। इसी तरह सीहोर जिले के सलकनपुर में देवी लोक और ओरछा में श्री रामराजा लोक लगभग पूर्णता के करीब हैं।
सांस्कृतिक मानचित्र को मिली नई पहचान
मंदसौर में भगवान पशुपतिनाथ लोक परिसर का कार्य पूरा हो चुका है। वहीं भोपाल में वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप लोक, जानापाव में भगवान परशुराम लोक और महेश्वर में देवी अहिल्या संग्रहालय जैसे प्रकल्पों ने प्रदेश के सांस्कृतिक मानचित्र को और अधिक समृद्ध किया है। (इनपुट: आईएएनएस)
