सीएम डॉ. मोहन यादव ने 5 फसलों पर की बड़ी घोषणा, उड़द पर दिया जाएगा बोनस, भावांतर के दायरे में आएगी सरसों

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विधानसभा में ‘कृषक कल्याण वर्ष 2026’ की घोषणा करते हुए किसानों के लिए कई बड़े ऐलान किए हैं। सरकार 5 प्रमुख फसलों—उड़द, सरसों, चना, मसूर और तुअर पर बोनस, भावांतर योजना और समर्थन मूल्य पर उपार्जन जैसे लाभ देगी, जिसका उद्देश्य किसानों को उद्यमी और ऊर्जादाता बनाना है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने श्रीकृष्ण गुरूकुल शिक्षा यात्रा में शामिल सभी संतों, तीर्थ पुरोहित महासंघ, धर्म यात्रा महासंघ और विश्व हिंदू परिषद का अभिनंदन करते हुए कहा कि आज उज्जैन एक अद्भुत क्षण का साक्षी बन रहा है। यात्रा में सम्मिलित सभी सहभागी उस मार्ग पर चलकर आए हैं, जिस पर हमारे आराध्य श्रीकृष्ण शिक्षा ग्रहण करने के लिए मथुरा से उज्जैन स्थित आचार्य सांदीपनी के आश्रम पधारे थे। संतगण को उस पावन मार्ग से गुजरने का अवसर मिला, जहां श्रीकृष्ण की चरणरज पड़ी थी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मथुरा से आरंभ श्रीकृष्ण गुरूकुल शिक्षा यात्रा के उज्जैन में आयोजित समापन समारोह को भोपाल स्थित मुख्यमंत्री निवास से वर्चुअली संबोधित कर रहे थे।

भोपाल: मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने किसानों के हित में एक बड़ा कदम उठाते हुए वर्ष 2026 को “कृषक कल्याण वर्ष” के रूप में मनाने का फैसला किया है। सोमवार को विधानसभा सत्र के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसकी घोषणा करते हुए 5 प्रमुख फसलों पर किसानों को सीधा आर्थिक लाभ पहुंचाने वाली कई योजनाओं का ऐलान किया। इन घोषणाओं का सीधा असर उड़द, सरसों, चना, मसूर और तुअर की खेती करने वाले लाखों किसानों पर पड़ेगा।

सरकार का लक्ष्य किसानों को सिर्फ ‘अन्नदाता’ तक सीमित न रखकर उन्हें ‘ऊर्जादाता’ और ‘उद्यमी’ के रूप में भी स्थापित करना है। मुख्यमंत्री ने सदन में कहा कि किसानों का सशक्तिकरण ही प्रदेश के सर्वांगीण विकास की आधारशिला है।

सरसों पर भावांतर और उड़द पर मिलेगा बोनस

इस साल प्रदेश में सरसों के रकबे में लगभग 28% की वृद्धि दर्ज की गई है। किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य दिलाने के लिए सरकार ने सरसों को भावांतर योजना के तहत लाने का निर्णय लिया है। केंद्र द्वारा सरसों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) ₹6200 प्रति क्विंटल तय है, जबकि जनवरी में औसत मंडी दर ₹6000 प्रति क्विंटल रही। इस योजना के तहत, पंजीकृत किसानों को MSP से कम मूल्य पर उपज बिकने पर होने वाले नुकसान की भरपाई सरकार करेगी। इसके लिए राज्य सरकार ने केंद्र को विधिवत प्रस्ताव भी भेज दिया है।

इसके अलावा, ग्रीष्मकालीन मूंग की जगह उड़द की खेती को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण घोषणा की गई। सरकार ग्रीष्मकालीन उड़द की फसल पर किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य के अतिरिक्त ₹600 प्रति क्विंटल का बोनस देगी। यह कदम फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए उठाया गया है।

“किसान खुशहाल होंगे, तभी ‘समृद्ध किसान-समृद्ध प्रदेश’ का सपना साकार होगा। हमारी सरकार किसानों को ‘अन्नदाता’ के साथ-साथ ‘ऊर्जादाता’ और ‘उद्यमी’ भी बनाने की दिशा में बढ़ रही है।”- डॉ. मोहन यादव, मुख्यमंत्री, मध्य प्रदेश

दलहन उपार्जन के लिए केंद्र को भेजे गए प्रस्ताव

राज्य सरकार ने दलहनी फसलों के उपार्जन के लिए भी तैयारी तेज कर दी है। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्राइस सपोर्ट स्कीम (PSS) के तहत चना और मसूर की सरकारी खरीद के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है।

  • चना: 6.49 लाख मीट्रिक टन उपार्जन का प्रस्ताव।
  • मसूर: 6.01 लाख मीट्रिक टन उपार्जन का प्रस्ताव।

इन दोनों फसलों के लिए उपार्जन की अवधि 24 मार्च से 30 मई 2026 तक प्रस्तावित है। किसानों के पंजीयन की प्रक्रिया 20 फरवरी से शुरू हो चुकी है और 16 मार्च 2026 तक जारी रहेगी।

इसी तरह, खरीफ फसल तुअर के लिए भी प्राइस सपोर्ट स्कीम के अंतर्गत 1.31 लाख मीट्रिक टन की सीधी खरीद का प्रस्ताव केंद्रीय एजेंसियों (नाफेड एवं एनसीसीएफ) के माध्यम से कराने के लिए भारत सरकार को भेजा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया कि सरकार किसानों को सिंचाई, बिजली और कृषि ऋण जैसी हर जरूरी सुविधा मुहैया कराने के लिए प्रतिबद्ध है।