आईसीएमआर ने लॉन्च किया देश का सबसे बड़ा जैव चिकित्सा नवाचार एवं प्रौद्योगिकी हस्तांतरण कार्यक्रम

आईसीएमआर ने लॉन्च किया देश का सबसे बड़ा जैव चिकित्सा नवाचार एवं प्रौद्योगिकी हस्तांतरण कार्यक्रम

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के अंतर्गत भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद ने सोमवार को नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में देश के सबसे बड़े जैव चिकित्सा नवाचार एवं प्रौद्योगिकी हस्तांतरण कार्यक्रम “मेडिकल इनोवेशन पेटेंट मित्र : इनोवेटर्स-टू-इंडस्ट्री कनेक्ट” का आयोजन किया। इस पहल के तहत जैव चिकित्सा नवाचार और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के लिए देश के पहले संरचित प्लेटफॉर्म की शुरुआत की गई।

विज्ञान और उद्योग के बीच साझेदारी को मिलेगा बढ़ावा

कार्यक्रम का उद्घाटन केंद्रीय राज्य मंत्री प्रतापराव गणपतराव जाधव ने किया। इस अवसर पर नीति आयोग के सदस्य गोबरधन दास भी उपस्थित रहे। प्रतापराव जाधव ने कहा कि यह पहल भारतीय विज्ञान को उद्योग से जोड़ने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। इससे प्रयोगशालाओं में विकसित नवाचार जन स्वास्थ्य को मजबूत करने वाली प्रौद्योगिकियों में तब्दील होंगे। उन्होंने कहा कि भारत अब केवल स्वास्थ्य प्रौद्योगिकियों का उपभोक्ता नहीं, बल्कि किफायती और नवोन्मेषी स्वास्थ्य समाधानों का वैश्विक स्रोत बनने की ओर बढ़ रहा है।

स्वास्थ्य प्रौद्योगिकियों में वैश्विक नेतृत्व की क्षमता

नीति आयोग के सदस्य गोबरधन दास ने कहा कि भारत के पास स्वास्थ्य प्रौद्योगिकियों में वैश्विक नेता के रूप में उभरने की वैज्ञानिक क्षमता और मजबूत नवाचार इकोसिस्टम मौजूद है। उन्होंने कहा कि मेडिकल इनोवेशन पेटेंट मित्र बौद्धिक संपदा की रक्षा, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और स्वदेशी नवाचारों को समाज तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

आईसीएमआर ने 41 सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रौद्योगिकियां उद्योग को सौंपीं

भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के महानिदेशक और स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के सचिव राजीव बहल ने कहा कि यह पहल आईसीएमआर की अत्याधुनिक अनुसंधान को उद्योग क्षेत्र की साझेदारी के माध्यम से लोगों तक पहुंचाने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। कार्यक्रम के दौरान आईसीएमआर संस्थानों और नवप्रवर्तकों द्वारा उद्योग भागीदारों को 41 सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रौद्योगिकियां हस्तांतरित की गईं। इनमें उन्नत निदान, टीके, चिकित्सा उपकरण और अन्य जैव चिकित्सा समाधान शामिल हैं। हस्तांतरित प्रौद्योगिकियों में टाइफाइड और पैराटाइफाइड के लिए ग्लाइकोकॉन्जुगेट और रिकॉम्बिनेंट टीके, जापानी एन्सेफलाइटिस, तपेदिक और चेचक जैसी बीमारियों के लिए निदान तकनीकें शामिल हैं।

पहली बार उद्योग को सौंपे गए निष्क्रिय केएफडी और चांदीपुरा वायरस बायोमटेरियल

कार्यक्रम की एक बड़ी उपलब्धि के रूप में निष्क्रिय केएफडी और चांदीपुरा वायरस बायोमटेरियल पहली बार उद्योग क्षेत्र के भागीदारों को सौंपे गए। इससे देश के जैव चिकित्सा अनुसंधान और टीका निर्माण इकोसिस्टम को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

100 से अधिक प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन

इस आयोजन में आईसीएमआर संस्थानों, शोधकर्ताओं और स्टार्टअप्स द्वारा विकसित 100 से अधिक प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन किया गया। इनमें निदान, उपचार और चिकित्सा उपकरणों से जुड़ी तकनीकें शामिल थीं। कार्यक्रम में नवप्रवर्तकों और उद्योग हितधारकों के बीच प्रत्यक्ष संवाद की भी व्यवस्था की गई।

विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को मिलेगा बल

कार्यक्रम के दौरान ‘इंडियन बायोमेडिकल पेटेंट लैंडस्केप रिपोर्ट’ और ‘टेक्नोलॉजी कंपेंडियम’ भी जारी किए गए। विशेषज्ञों का मानना है कि “इनोवेटर्स-टू-इंडस्ट्री कनेक्ट” पहल मजबूत सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। (इनपुट: पीआईबी)