गिरिजा अम्मा के संकल्प को पीएम मोदी का सलाम, सैनिकों के लिए जुटाए 40 लाख रुपये

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ‘मन की बात’ कार्यक्रम में 11वीं सदी के ‘चोल ताम्र-पत्रों’ के बारे में बात की, जिन्हें उनकी हाल की नीदरलैंड यात्रा के दौरान भारत वापस लाया गया था। इन ‘चोल ताम्र-पत्रों’ 21 बड़ी और 3 छोटी पट्टियां हैं, जो मुख्य रूप से तमिल भाषा में लिखी हुई हैं। पीएम मोदी ने कहा कि हर भारतीय के लिए यह एक खुशी का पल है।
‘मन की बात’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “बीते दिनों मुझे यूरोप के नीदरलैंड जाने का अवसर मिला। वहां मैं कई बैठकों में शामिल हुआ। इसी दौरान एक ऐसा क्षण आया, जिसने हर भारतीय को गर्व से भर दिया। नीदरलैंड में आयोजित एक विशेष समारोह में चोला काल की प्राचीन ताम्र पट्टिकाएं भारत को वापस सौंपी गईं। उस कार्यक्रम में नीदरलैंड के प्रधानमंत्री भी मौजूद थे। इन ताम्र पट्टिकाओं को लेकर मुझे देश-विदेश से लगातार संदेश मिल रहे हैं। लोग खुशी जता रहे हैं, गर्व व्यक्त कर रहे हैं। दुनियाभर के तमिल समुदाय में भी इसे लेकर विशेष उत्साह है।”
‘चोल ताम्र-पत्रों’ के बारे में बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “इन ताम्र पट्टिकाओं को लेकर लोगों में काफी जिज्ञासा भी है। इसलिए आज मैं इससे जुड़ी कुछ बातें आपसे साझा करना चाहता हूं। इनमें 21 बड़ी और तीन छोटी ताम्र पट्टिकाएं हैं। ये मुख्य रूप से राजा राजेंद्र चोला-प्रथम की ओर से अपने पिता राजा राजराजा चोला के एक वचन को पूरा करने से जुड़ी हैं। इनमें आनइमंगलम् गांव को एक बौद्ध विहार को दान देने का उल्लेख है। इन ताम्र पट्टिकाओं में चोला वंश की उपलब्धियों का भी वर्णन मिलता है। इनसे पता चलता है कि चोला साम्राज्य की समुद्री शक्ति कितनी मजबूत थी दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों के साथ उनके संबंधों की जानकारी भी इनमें मिलती है।”
उन्होंने कहा कि चोला साम्राज्य के समृद्ध इतिहास और संस्कृति पर हम सभी को बहुत गर्व है। हमारी सरकार भारत की ऐसी अमूल्य धरोहरों के संरक्षण के लिए लगातार प्रयास कर रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा, “‘ज्ञान भारतम् अभियान’ के तहत छत्तीसगढ़ के मल्हार में भी एक महत्वपूर्ण खोज हुई है। यहां तीन दुर्लभ ताम्र पट्टिकाएं मिली हैं। ये पांडुवंशी राजवंश के महर्षि बालार्जुन के शासनकाल से जुड़ी मानी जा रही हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि ये शिलालेख छठी-सातवीं सदी के हैं, यानि चौदह-सौ, पंद्रह-सौ साल पुराने ये ताम्र पट्टिकाएं प्राचीन ब्राह्मी लिपि और पाली भाषा में लिखी गई हैं। इनसे उस समय की शासन-व्यवस्था, धर्म और संस्कृति के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ‘मन की बात’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए तमिलनाडु के नागरकोइल की एक शिक्षिका गिरिजा अम्मा से हुई अपनी मुलाकात का अनुभव शेयर किया। पीएम मोदी ने गिरिजा अम्मा की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनकी देशभक्ति की भावना हर भारतवासी को प्रेरित करने वाली है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा, “पिछले महीने मुझे एक बहुत अच्छा अनुभव हुआ। इसका संबंध ‘मन की बात’ से भी जुड़ा है। इसलिए आज मैं इसकी चर्चा आपसे करना चाहता हूं। तमिलनाडु के नागरकोइल में मेरी मुलाकात एक टीचर से हुई। करीब तीन दशक पहले भी मैं उनसे मिला था। मैं बात कर रहा हूं, गिरिजा अम्मा की। इस मुलाकात के दौरान कुछ युवा छात्र भी उनके साथ थे।”
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि गिरिजा अम्मा करीब 15 स्कूल चलाती हैं। इनमें चेन्नई का जयगोपाल गरोडिया हिंदू विद्यालय बहुत प्रमुख है। उनकी देशभक्ति की भावना हर भारतवासी को प्रेरित करने वाली है। उन्होंने ‘मन की बात’ से प्रेरणा लेकर देश के अनेक सैनिकों के लिए योगदान का संकल्प लिया। इसके लिए उन्होंने अपने सभी स्कूलों के छात्रों को प्रेरित किया।
पीएम मोदी ने बताया, “गिरिजा अम्मा ने बच्चों से कहा कि वे वीर जवानों के लिए हर दिन एक रुपया योगदान दें। यानी एक साल में हर छात्र की ओर से 365 रुपए जमा हुए। इस छोटे-छोटे योगदान से करीब 40 लाख रुपए इकट्ठा हुए। गिरिजा अम्मा ने इस पूरी राशि का चेक मुझे सौंपा। उनसे बातचीत के दौरान मैंने महसूस किया कि मां भारती के प्रति उनका समर्पण कितना गहरा है।”
प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी बताया कि पिछले वर्ष ही चेन्नई के पहले हिंदू विद्यालय ने अपने 50 वर्ष पूरे किए हैं। देश की शिक्षा और सांस्कृतिक गौरव को आगे बढ़ाने में इस स्कूल नेटवर्क की भूमिका बहुत प्रशंसनीय है। मैं इससे जुड़े सभी लोगों को बहुत-बहुत बधाई देता हूं और उन छात्रों की भी विशेष सराहना करता हूं, जिन्होंने अपने वीर सैनिकों के लिए योगदान दिया।

