

मध्यप्रदेश विधुत कर्मचारी संघ फेडरेशन के महामंत्री राकेश डी पी पाठक ने कहा कि श्रमिकों, कार्मिकों के शोषण को बढ़ावा देने बने नये श्रम कानूनों खिलाफ और इसको रद्द करने, बेरोजगारी के लिए जिम्मेदार जनविरोधी नीतियों, बिजली कंपनियों के निजीकरण, संविदा, आउट सोर्स कार्मिकों को नियमित नियुक्ति न देने, पुरानी पेंशन लागू नहीं करने के विरोध में देश के 10 राष्ट्रीय श्रम संगठनों के आव्हान पर आयोजित हड़ताल के समर्थन में मध्यप्रदेश विधुत कर्मचारी संघ फेडरेशन ने वृहद स्तर पर धरना, प्रदर्शन किया। जिसमें बड़ी संख्या में कर्मचारी गण उपस्थित थे।
मध्यप्रदेश विधुत कर्मचारी संघ फेडरेशन के महामंत्री राकेश डी पी पाठक, दिनेश दुबे, दीपक मेमने, शिवहरि श्रीवास्तव, दिलीप पाठक, दयाशंकर द्विवेदी, केदार सिंह बघेल,सी एस पालीवाल, श्रीमती सुषमा उपाध्याय, श्रीमती आरती शुक्ला, श्रीमती श्याम गोस्वामी, श्रीमती अजिता विश्वकर्मा, श्रीमती रुपाली, श्रीमती रुचि, कुमारी अमृता, कुमारी वैष्णवी, श्रीमती मानसी पांडे, अजित ठाकुर,राजू नायडू,रवि बहादुर, ललित विश्वकर्मा, राजेन्द्र चक्रवती, आशीष नाथ, सुनील अहिरवार, दिलीप विश्वकर्मा, घनश्याम पटेल,चेतन गुप्ता,सहित बड़ी संख्या में फेडरेशन के साथी गणों ने इस कानून का विरोध किया।
दिनेश दुबे ने कहा कि सरकार को उघोग हित के साथ कर्मचारियों के हित संवर्धन का भी ध्यान रखा जाना चाहिए, ये कानून वापस होना चाहिए। नियमित पृवत्ति के काम का आउट सोर्स नहीं होना चाहिए।
दीपक मेमने ने कहा कि निजीकरण से वर्तमान कर्मियों और पेंशनर्स दोनों का भविष्य असुरक्षित हो जाएगा।
फेडरेशन महामंत्री राकेश डी पी पाठक ने कहा कि आज इंटक के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ जी संजीवा रेड्डी जी और मध्यप्रदेश के अध्यक्ष श्री श्याम सुंदर यादव जी के आव्हान पर भव्य प्रदर्शन आयोजित हुआ। प्रदर्शन को संबोधित करते हुए राकेश डी पी पाठक ने कहा कि इन श्रम संहिता के लागू होने कारण अब श्रमिकों, कार्मिकों की सुरक्षा, सुविधा और समस्याओं के समाधान होना मुश्किल हो जाएगा, वल्कि उघोग पतियो ,प्रंबधन की मनमानी चलने लगेगी। श्रम संगठनों का रजिस्ट्रेशन,संचालन और श्रमिकों, कार्मिकों के हित संवर्धन और प्रगति के लिए मांग करना, आंदोलन, सत्याग्रह करना मुश्किल हो जाएगा। सब प्रबंधन, प्रशासन और उघोग पतियो के रहमो-करम पर निर्भर हो जाएगा। तत्काल बिजली कंपनियों के निजीकरण को बंद किया जाना चाहिए क्योंकि इससे अभियंताओं, कमचारियों से ज्यादा आम जनता का नुक़सान होगा।राकेश डी पी पाठक ने कहा कि न्यू पेंशन की जगह पुरानी पेंशन ही लागू होना चाहिए। बिजली सेक्टर आज भी कंपनीकरण का दुष्परिणाम भोग रहा है। आज कर्मचारियों, पेंशनर्स के साथ उपभोक्ता भी परेशान हैं। अतः कंपनीकरण बंद होना चाहिए। राकेश पाठक ने कहा कि पहले सरकार उघोगपतियो के साथ श्रमिकों का विशेष ध्यान रखकर कानून बनातीं थी, अब नहीं।इन श्रम संहिताओं ने मालिक और पूंजी के पक्ष में संतुलन को और झुका दिया है। श्रमिकों, कार्मिकों की छंटनी और लाॅक आउट को आसान बना दिया है। आज जब काम, नौकरी पहले से अधिक असुरक्षित, अनुबंध आधारित और असंगठित हो चुका है तब सरलीकरण का अर्थ उघोगपतियो को यह अधिकार दे देना वे जब चाहें मजदूरों को निकाल बाहर कर सकते हैं। क्योंकि पहले 44 कानून मजदूरों, कार्मिकों को अलग-अलग सुरक्षा प्रदान करते थे।
आज बिजली बिजली सेक्टर में 15 सालों से भी ज्यादा समय से संविदा, आउट सोर्स कर्मचारी गण नियमित होने की बाट जोहते हुए अपनी आधी सेवा आयु पूर्ण कर चुके हैं ,अब इस उम्र में उनसे परीक्षा लेकर नियमित करने का आदेश विसंगति पूर्ण हैं। विसंगति दूर कर 80 अंक की जगह न्यूनतम अंक 50 निर्धारित किया जाएं। महामंत्री राकेश डी पी पाठक ने कहा कि सरकार इन श्रम संहिताओं को वापस ले और बिजली सेक्टर की सभी कंपनियों में कार्यरत सभी संविदा और आउट सोर्स कर्मचारियों को बिना शर्त नियमित किया जाए। पुरानी पेंशन बहाल की जाएं। वहीं पेंशन प्राप्त कर रहे सभी श्रेणी के पेंशनरों की पेंशन की सुरक्षा की गारंटी राज्य और केंद्र सरकार लें। मध्यप्रदेश में नियमित कर्मचारियों के साथ पेंशनर्स को भी महंगाई राहत, परिवार पेंशन राहत दी जाएं। राज्य बंटवारे की धारा 49 को समाप्त का आदेश शीघ्र जारी कर कर्मचारियों के महंगाई भत्ता के साथ पेंशनर्स को महंगाई राहत का एक साथ आदेश और भुगतान किया जाएं । सभी कार्मिकों के कार्य का समय एक समान 8 घंटे निर्धारित हो। कार्य स्थल पर समुचित सुरक्षा प्रदान करें। सभी श्रमिकों जिनमें योजना श्रमिक भी शामिल हैं के लिए न्यूनतम मजदूरी 26000 रुपए निर्धारित हो। महंगाई भत्ता डीए जोड़कर सुनिश्चित करें।
प्रदर्शन में बड़ी संख्या मे फेडरेशन के साथियों ने बुलंद आवाज में नारेबाजी कर प्रदर्शन किया। कार्यक्रम का संचालन दयाशंकर द्विवेदी ने और आभार प्रदर्शन दिलीप पाठक ने व्यक्त किया।

