प्रविष्टि तिथि: 02 DEC 2025 6:43PM by PIB Delhi
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने लड़ाकू विमानों से बाहर निकलने के लिए विकसित एस्केप सिस्टम का नियंत्रित वेग पर उच्च-गति रॉकेट-स्लेज परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया है। चंडीगढ़ स्थित टर्मिनल बैलिस्टिक्स रिसर्च लेबोरेटरी की रेल-ट्रैक रॉकेट-स्लेज सुविधा में किए गए इस परीक्षण में कैनोपी सेवरेंस, इजेक्शन सीक्वेंसिंग और संपूर्ण एयरक्रू रिकवरी प्रक्रिया की प्रभावी पुष्टि देखी गई।
यह परीक्षण एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (एडीए) और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के सहयोग से सफलतापूर्वक सम्पन्न किया गया। यह अत्यंत जटिल और गतिशील परीक्षण भारत को उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल करता है, जिनके पास उन्नत इन-हाउस एस्केप सिस्टम के पूर्ण परीक्षण की क्षमता उपलब्ध है।
गतिशील इजेक्शन परीक्षण, नेट टेस्ट या जीरो-जीरो टेस्ट जैसे स्थैतिक परीक्षणों की तुलना में कहीं अधिक जटिल होते हैं और इजेक्शन सीट के समग्र प्रदर्शन तथा कैनोपी सेवरेंस सिस्टम की वास्तविक प्रभावकारिता का सबसे विश्वसनीय मानक माने जाते हैं। इस परीक्षण के दौरान एलसीए विमान के अग्रभाग को एक दोहरी स्लेज प्रणाली के साथ संयोजित किया गया, जिसे कई ठोस प्रणोदक रॉकेट मोटर्स के चरणबद्ध प्रज्वलन द्वारा नियंत्रित वेग पर सटीक रूप से आगे बढ़ाया गया।
कैनोपी फ्रेजिलाइजेशन पैटर्न, इजेक्शन सीक्वेंसिंग और संपूर्ण एयरक्रू रिकवरी प्रक्रिया का मूल्यांकन एक इंस्ट्रूमेंटेड एंथ्रोपोमॉर्फिक टेस्ट डमी के माध्यम से किया गया, जिसने इजेक्टेड पायलट द्वारा वास्तविक परिस्थितियों में अनुभव किए जाने वाले महत्त्वपूर्ण भार, क्षण तथा त्वरण को सटीक रूप से रिकॉर्ड किया। पूरे परीक्षण अनुक्रम को ऑनबोर्ड और ग्राउंड-आधारित हाई-स्पीड इमेजिंग सिस्टम की मदद से विस्तृत रूप में कैप्चर किया गया। इस परीक्षण का अवलोकन भारतीय वायु सेना (आईएएफ) तथा इंस्टीट्यूट ऑफ एयरोस्पेस मेडिसिन एंड सर्टिफिकेशन के अधिकारियों द्वारा किया गया।
रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने इस सफल परीक्षण पर डीआरडीओ, भारतीय वायुसेना, एडीए, एचएएल और रक्षा उद्योग जगत को बधाई दी। उन्होंने इसे आत्मनिर्भरता की दिशा में स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकी को सशक्त बनाने वाला एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर करार दिया।
रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव तथा डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने भी इस सफल प्रदर्शन के लिए वैज्ञानिकों एवं इंजीनियरों सहित पूरी डीआरडीओ टीम को बधाई दी।
