
बुधवार को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, साल भर की स्थिरता के बाद भारतीय शेयर बाजार 2026 में मजबूत स्थिति के साथ प्रवेश कर रहा है। बेहतर वैल्यूएशन, कमाई को लेकर यथार्थवादी उम्मीदें और देश की मजबूत आर्थिक स्थिति बाजार को लेकर सकारात्मक नजरिया बना रही हैं।
वैश्विक अनिश्चितता के बीच मजबूत मैक्रो फंडामेंटल्स
हालांकि वैश्विक घटनाक्रम समय-समय पर अनिश्चितता पैदा कर सकते हैं, लेकिन स्मॉलकेस मैनेजर्स का मानना है कि भारत के मैक्रो फंडामेंटल्स यानी आर्थिक नींव अब भी मजबूत बनी हुई है। उनका कहना है कि यह साल उन निवेशकों के लिए बेहतर साबित हो सकता है, जो केवल बाजार की तेजी नहीं, बल्कि कंपनियों की वास्तविक कमाई को देखकर निवेश करेंगे।
खपत आधारित ग्रोथ को मिलेगा सहारा
रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 में खपत के आधार पर आर्थिक विकास देखने को मिल सकता है। नियंत्रित महंगाई, टैक्स में संभावित कटौती, जीएसटी में राहत और ब्याज दरों में कमी से लोगों की खर्च करने की क्षमता बढ़ेगी और कर्ज लेना भी आसान होगा, जिससे बाजार को समर्थन मिलेगा।
2025 की तुलना में 2026 ज्यादा संतुलित
स्मॉलकेस मैनेजर और राइट रिसर्च के संस्थापक सोनम श्रीवास्तव ने कहा कि 2026 में बाजार की स्थिति 2025 की तुलना में अधिक संतुलित और सकारात्मक नजर आ रही है। शेयरों के मूल्यांकन अब अधिक उचित हैं, कमाई को लेकर उम्मीदें वास्तविक हैं और अर्थव्यवस्था स्थिर है।
कमाई आधारित रिटर्न पर रहेगा फोकस
उन्होंने कहा कि 2026 में निवेश से मिलने वाला रिटर्न मुख्य रूप से कंपनियों की कमाई पर निर्भर करेगा, न कि सिर्फ शेयरों के दाम बढ़ने पर। ऐसे में सोच-समझकर और चुनिंदा शेयरों में निवेश करना ज्यादा अहम होगा।
लार्ज कैप शेयर हो सकते हैं आकर्षक
वेल्थट्रस्ट कैपिटल सर्विसेज की स्मॉलकेस मैनेजर, संस्थापक और सीईओ स्नेहा जैन ने कहा कि 2025 में वैल्यूएशन में आई गिरावट के बाद अब कई लार्ज कैप शेयर मिड कैप और स्मॉल कैप से भी नीचे ट्रेड कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि लार्ज कैप कंपनियों की बैलेंस शीट, कैश फ्लो और कॉरपोरेट गवर्नेंस मजबूत है, जिससे अगले 6 से 8 महीनों में ये निवेश के लिहाज से आकर्षक हो सकती हैं।
पोर्टफोलियो में स्थिरता का आधार
स्नेहा जैन ने कहा कि लार्ज कैप शेयरों को ज्यादा मुनाफे की उम्मीद से नहीं, बल्कि पोर्टफोलियो में स्थिरता देने वाले मजबूत आधार के रूप में देखा जाना चाहिए। निवेश में संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
नीतिगत स्थिरता को प्राथमिकता
उनके मुताबिक, सरकार की राजकोषीय अनुशासन नीति, इंफ्रास्ट्रक्चर पर लगातार खर्च, मैन्युफैक्चरिंग और एमएसएमई सेक्टर को समर्थन तथा लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स को लेकर स्पष्टता, अल्पकालिक प्रोत्साहनों से कहीं ज्यादा अहम हैं।
आगामी बजट से इंफ्रास्ट्रक्चर और एमएसएमई को सहारा
स्मॉलकेस मैनेजर और लोटसड्यू वेल्थ एंड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स की सह-संस्थापक प्राची देउस्कर ने कहा कि आगामी केंद्रीय बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर, औपचारिक अर्थव्यवस्था और वित्तीय अनुशासन से जुड़ी नीतियों को आगे बढ़ाया जा सकता है। इसके साथ ही घरेलू निवेशकों की वित्तीय भागीदारी बढ़ाने के लिए भी कदम उठाए जाने की उम्मीद है।
एमएसएमई सेक्टर पर खास नजर
उन्होंने कहा कि एमएसएमई सेक्टर के लिए भी सहायक कदम देखने को मिल सकते हैं, जैसे फाइनेंस तक आसान पहुंच, क्रेडिट गारंटी और उत्पादकता बढ़ाने व बाजार तक पहुंच मजबूत करने वाले प्रोत्साहन। (इनपुट: आईएएनएस)
