
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को ‘नागरिकदेवो भव:’ की भावना को रेखांकित करते हुए ‘सेवा तीर्थ’ राष्ट्र को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि यह कदम जनसेवा और नागरिकों के कल्याण के प्रति सरकार की अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
‘नागरिक-प्रथम’ शासन का प्रतीक
प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘सेवा तीर्थ’ कर्तव्य, करुणा और ‘इंडिया फर्स्ट’ (भारत प्रथम) के सिद्धांत के प्रति अटूट समर्पण का उज्ज्वल प्रतीक है। उन्होंने आशा जताई कि यह पहल आने वाली पीढ़ियों को निस्वार्थ सेवा और जनकल्याण के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करेगी। यह कदम सत्ता में आने के बाद से शासन की मानसिकता में आए बदलाव को भी दर्शाता है, जिसमें नागरिकों को केंद्र में रखकर निर्णय लिए जा रहे हैं।
औपनिवेशिक विरासत से आगे बढ़ने की पहल
मोदी सरकार ने औपनिवेशिक अतीत की झलक दिखाने वाली संरचनाओं और नामों को बदलने का सुनियोजित प्रयास किया है। सार्वजनिक संस्थानों का पुनर्नामकरण और पुनर्सृजन, शासन में सेवा-भाव को सर्वोच्च स्थान देने की नीति को दर्शाता है। प्रधानमंत्री कार्यालय का नामकरण और उसे ‘सेवा तीर्थ’ के रूप में स्थापित करना इसी दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
एकीकृत प्रशासनिक ढांचा
‘सेवा तीर्थ’ परिसर में प्रधानमंत्री कार्यालय के साथ कैबिनेट सचिवालय और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार का कार्यालय भी एक ही स्थान पर स्थित हैं। इसके अलावा ‘कर्तव्य भवन 1’ और ‘कर्तव्य भवन 2’ का भी उद्घाटन किया गया है, जहां से रक्षा और विदेश मंत्रालय सहित कई अहम मंत्रालय एकीकृत रूप से काम करेंगे। इससे प्रशासनिक समन्वय मजबूत होने और निर्णय प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।
नाम परिवर्तन के जरिए संदेश
इससे पहले 2022 में ‘राजपथ’ का नाम बदलकर कर्तव्य पथ कर दिया गया था। इस बदलाव को अधिकार से कर्तव्य की ओर बढ़ने के प्रतीक के रूप में देखा गया। वर्ष 2016 में प्रधानमंत्री आवास का नाम बदलकर लोक कल्याण मार्ग किया गया था, जिसे पहले 7 रेस कोर्स रोड (आरसीआर) के नाम से जाना जाता था। इसी क्रम में कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ‘राज निवास’ का नाम बदलकर ‘लोक निवास’ किया गया, ताकि सत्ताधारी छवि की जगह जन-सेवा का संदेश स्थापित हो सके।
सेवा भावना को सर्वोपरि रखने की दिशा
अब प्रधानमंत्री कार्यालय का नया पता ‘सेवा तीर्थ’ है। कैबिनेट सचिवालय और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार का कार्यालय एक ही परिसर में होने से प्रशासनिक कामकाज में व्यापक बदलाव की उम्मीद है। सरकार का मानना है कि यह पहल शासन को नागरिक-प्रथम दृष्टिकोण के और करीब लाएगी तथा सेवा भावना और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को सर्वोपरि रखेगी। (इनपुट: आईएएनएस)
