
भारत ने परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। तमिलनाडु के कल्पक्कम में बने स्वदेशी प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) ने पहली बार सफलतापूर्वक “क्रिटिकलिटी” हासिल कर ली है, यानी इसमें नियंत्रित परमाणु श्रृंखला प्रतिक्रिया शुरू हो गई है।
यह 500 मेगावाट क्षमता वाला रिएक्टर भारत की तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा योजना के दूसरे चरण की शुरुआत का संकेत है। इस योजना की परिकल्पना वैज्ञानिक होमी जहांगीर भाभा ने की थी।
इस उपलब्धि के साथ भारत दुनिया का दूसरा देश बन जाएगा (रूस के बाद), जो फास्ट ब्रीडर रिएक्टर का व्यावसायिक संचालन करेगा।
फास्ट ब्रीडर रिएक्टर की खास बात यह है कि यह जितना ईंधन उपयोग करता है, उससे ज्यादा नया ईंधन पैदा कर सकता है। इसमें यूरेनियम-प्लूटोनियम मिश्रित ईंधन (MOX) का उपयोग होता है और यह यूरेनियम-238 को प्लूटोनियम-239 में बदलता है।
यह तकनीक भविष्य में थोरियम आधारित ऊर्जा उत्पादन के लिए रास्ता तैयार करती है। भारत के पास थोरियम का बड़ा भंडार है, जिसे तीसरे चरण में इस्तेमाल किया जाएगा।
भारत की तीन-चरणीय परमाणु योजना इस प्रकार है:
- पहले चरण में यूरेनियम से बिजली उत्पादन और प्लूटोनियम तैयार किया जाता है
- दूसरे चरण में फास्ट ब्रीडर रिएक्टर के जरिए ज्यादा ईंधन बनाया जाता है
- तीसरे चरण में थोरियम से दीर्घकालीन ऊर्जा उत्पादन किया जाएगा
यह पूरी प्रक्रिया “क्लोज्ड फ्यूल साइकिल” पर आधारित है, जिसमें इस्तेमाल किए गए ईंधन को दोबारा उपयोग किया जाता है।
वर्तमान में भारत की परमाणु ऊर्जा क्षमता 8.78 गीगावाट है और 2024-25 में 56,681 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन हुआ। आने वाले वर्षों में इसे बढ़ाकर 22.38 गीगावाट तक ले जाने की योजना है।
सरकार का लक्ष्य 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करना है। इसके लिए “न्यूक्लियर एनर्जी मिशन” के तहत 20,000 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है और छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) विकसित किए जा रहे हैं।
यह उपलब्धि भारत की ऊर्जा सुरक्षा, स्वदेशी तकनीक और स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
