जय रेवाखंड, मध्य प्रदेश जूनियर लॉयर्स एसोसिएशन व मध्यप्रदेश प्रगतिशील ब्राह्मण महासभा ने संभागायुक्त को ज्ञापन सौंपा

  • मेडिकल की मृत्यु रिपोर्ट हास्यास्पद : भर्ती होने के एक महीने पहले ही रोगी दिवंगत।
  • संगठनों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा वैक्सीन के बाद मेडिकल कॉलेज में घोर लापरवाही से हुई जे के बाजपेई की मृत्यु, जिसकी निष्पक्ष जांच की जाए।
  • वैक्सीन के साइड इफ़ेक्ट से मरने वाले मरीज के परिजनों को क्षतिपूर्ति की मांग करते हुए कहा निजी अस्पतालों को दिया गया है “लूट ” का लाइसेंस, निजी अस्पतालों को करो अधिग्रहित कोरोना मरीजों के उपचार हेतु

जबलपुर/न्यूज लाइफ। जय रेवाखंड , मध्य प्रदेश जूनियर लॉयर्स एसोसिएशन व मध्यप्रदेश प्रगतिशील ब्राह्मण महासभा के शिष्ट मंडल ने संयुक्त रूप से श्री जे के बाजपेई के परिजनों सहित संभागायुक्त के नाम ज्ञापन सौंपकर वैक्सीनेशन लगने के बाद श्री जेके वाजपेयी की मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान हुई मृत्यु से जुड़ी हुई परिस्थितियों व उनके इलाज में बरती गई घोर लापरवाही की निष्पक्ष जांच तथा दोषियों पर कठोर कार्रवाई हेतु तथा श्री वाजपेयी के परिजनों को क्षतिपूर्ति राशि दिलाने और मेडिकल कॉलेज व अन्य शासकीय अस्पतालों में कोरोना के मरीजों के उपचार व उनकी समुचित देखरेख के लिए समुचित व्यवस्था करवाने तथा निजी अस्पतालों को कोरोना के मरीजों के उपचार के लिए अधिग्रहित करने के लिए ज्ञापन सौंपा।

संगठनों ने ज्ञापन के माध्यम से खुला आरोप लगाया कि मेडिकल प्रशासन की लापरवाही से मरीज जे के बाजपेई की मृत्यु हो गई है । एमपीईबी से सेवानिवृत्त श्री जेके वाजपेई पूर्णतः स्वस्थ थे और उन्होंने स्वप्रेरणा से विगत 25 मार्च को मेडिकल कॉलेज में कोविड-19 की वैक्सीन लगवाई थी।जिसके बाद निरंतर उनका स्वास्थ्य खराब होने के बाद 3 अप्रैल को उन्हें मेडिकल कॉलेज में इलाज हेतु भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज वैक्सीन के बाद के रोगी के रूप में इलाज के लिए भर्ती किया गया। उनका कोविड-19 टेस्ट निगेटिव आया किंतु उन्हें सांस लेने में तकलीफ बनी रही और उनका उचित इलाज व देखरेख ना मिलने के कारण अस्पताल के बाथरूम में उनकी मृत देह मिली। मेडिकल कॉलेज से जारी मृत्यु रिपोर्ट में रोगी की श्रेणी ” पोस्ट कोविड वैक्सीनेशन” दी गई व मृत्यु का कारण रेस्पीरेटरी फैल्योर बताया गया जिसका चिकित्सकीय शब्दावली में अर्थ होता है मरीज के रक्त में पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन की कमी या अत्याधिक कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा। संगठनों ने आरोप लगाया कि यह भी संदेहास्पद है कि यदि वैक्सीन के साइड इफ़ेक्ट के कारण उनमें कोरोना के सभी लक्षण मौजूद थे और मृत्यु भी श्वसन क्रिया से सम्बंधित है, तो कोरोना रिपोर्ट नकारात्मक क्यों आई ?

ऐसे में सवाल खड़े होते है कि क्या वैक्सीन के बाद के साइड इफ़ेक्ट को छिपाने के लिए कोरोना की रिपोर्ट निगेटिव दी गई ? लोक तंत्र में यह आम जनता का जानने का अधिकार है कि हकीकत क्या है ?
मेडिकल की हास्यास्पद मृत्यु रिपोर्ट : मृत मरीज का चल रहा था इलाज।

संगठनों ने यह भी आरोप लगाया कि श्री की मृत्यु रिपोर्ट बनाने में भी गंभीर लापरवाही बरती गई है। रिपोर्ट में मरीज को भर्ती 4 अप्रैल को होना इंगित किया गया है, जबकि मृत्यु की तिथि 6 मार्च दर्शाई गई है मतलब मरीज भर्ती होने के एक माह पहले ही मर चुका था और इसी तरह एक अन्य तिथि रिक्त छोड़ दी गई है।
संगठनों ने यह भी कहा कि किन्तु मेडिकल कॉलेज में श्री बाजपेई को कोई देखरेख ही नहीं कर रहा था उनकी मृत देह बाथरूम से प्राप्त हुई। केवल यह एक विशिष्ट प्रकरण नहीं है मेडिकल कॉलेज में इसी प्रकार की अन्य मृत्यु भी हुई हैं और एक प्रकरण में बाथरूम में गिरने से सिर की चोट से कोरोना मरीज की मृत्यु हो गई। इस बात के बावजूद कि केंद्र सरकार ने वैक्सीन के साइड इफेक्ट वाले व्यक्तियों की विशेष निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। मेडिकल कॉलेज में वैक्सीन लगने के बाद श्री वाजपेयी को हुए साइड इफेक्ट के इलाज में गंभीर लापरवाही व कोताही बरती गई है।

क्षतिपूर्ति दो वैक्सीन के साइड इफ़ेक्ट से मरने वाले मरीज के परिजनों को
संगठनों ने यह भी मांग किया कि वैक्सीन के साइड इफेक्ट के परिणामस्वरुप मरने वाले व्यक्ति के व्यक्ति को शासन तथा वैक्सीन कंपनी क्षतिपूर्ति प्रदान करे निजी अस्पतालों को करो अधिग्रहित कोरोना मरीजों के उपचार हेतु।
संगठनों ने यह भी आरोप लगाया कि ऐसा स्पष्ट प्रतीत हो रहा है कि कोरोना की दूसरी लहर से निपटने प्रशासन ने कोई भी तैयारी नहीं की है। कोरोना के मरीज दर दर भटक रहे हैं और तिल तिल कर मरने मजबूर हैं। शासन ने आवश्यकता पड़ने पर निजी अस्पतालों को “अधिग्रहीत” करने की बात की थी , किन्तु “अधिग्रहीत” करने के स्थान पर निजी अस्पतालों को कोरोना इलाज के लिए “अधिकृत” कर दिया गया और निजी अस्पतालों को “लूट” का लाइसेंस मिल गया। केवल साधन संपन्न और प्रभावशील जन निजी अस्पतालों में इलाज करा रहा है। आम मरीज इन अस्पतालों के दर पर भर्ती होने की गुहार करते हुए दम तोड़ रहा है।

ज्ञापन के दौरान जय रेवाखंड के प्रदेश संगठन मंत्री असीम त्रिवेदी , मध्य प्रदेश हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के सह सचिव पंकज तिवारी एड., जूला के प्रदेश संगठन मंत्री राजेश खरे एड.,आशीष कुमार तिवारी एड., ब्राह्मण महासभा के प्रदेश महामंत्री पं. वेद प्रसाद तिवारी, प्रदेश प्रवक्ता पं. वैभव पाठक, अरविन्द सिंह चौहान एड., देवेन्द्र सिंह एड. व श्री बाजपेई के परिजन सुशील पाठक आदि प्रमुख रूप से उपस्थित थे।

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