
बेंगलुरु स्थित प्रशांति कुटीरम परिसर में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 के 100 दिवसीय काउंटडाउन श्रृंखला के अंतर्गत योग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में लगभग 650 प्रतिभागियों ने भाग लिया और सामान्य योग प्रोटोकॉल सत्र में सक्रिय रूप से शामिल हुए।
बेंगलुरु में बड़े पैमाने पर योग सत्र
स्वामी विवेकानंद योग अनुसंधान संस्थान (एस-व्यासा) ने मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान के सहयोग से काउंटडाउन श्रृंखला के 36वें दिन यह आयोजन किया। कार्यक्रम में प्रतिभागियों ने सामूहिक रूप से योग अभ्यास किया और योग के व्यावहारिक पहलुओं को समझा।
योग के वैज्ञानिक महत्व पर जोर
संस्थान के संस्थापक कुलाधिपति पद्म श्री एच. आर. नागेंद्र ने योग के वैज्ञानिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि योग न केवल शारीरिक स्वास्थ्य बल्कि मानसिक संतुलन और आंतरिक सद्भाव को भी मजबूत करता है।
डिजिटल युग में योग और मानसिक स्वास्थ्य पर चर्चा
कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने ‘‘स्वास्थ्य और ज्ञान के लिए योग’’ विषय पर संगोष्ठी में भाग लिया। इसमें डिजिटल युग में युवाओं पर पड़ने वाले मानसिक दबाव, तनाव और सूचना के अत्यधिक प्रभाव जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई।
युवाओं के लिए योग की परिवर्तनकारी भूमिका
योग चिकित्सा विद्यालय के सहायक प्रोफेसर डॉ. बालाजी आर. ने युवाओं के समग्र स्वास्थ्य में योग की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने योग को जागरूकता, भावनात्मक संतुलन और बेहतर जीवनशैली की दिशा में एक महत्वपूर्ण साधन बताया।
मानसिक संतुलन के लिए योग की अवधारणा
कृष्णमाचार्य योग मंदिरम की तकनीकी सलाहकार डॉ. लता सतीश ने डिजिटल अधिभार और मानसिक तनाव के प्रभावों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि योग मानसिक स्थिरता, ऊर्जा संतुलन और स्पष्ट सोच विकसित करने में सहायक है।
योग को जीवनशैली में शामिल करने पर जोर
विशेषज्ञों ने आसन, प्राणायाम, ध्यान, आहार और संयम जैसे योगिक सिद्धांतों को दैनिक जीवन में अपनाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि आधुनिक डिजिटल जीवन में योग तनाव को कम करके मानसिक शांति प्रदान कर सकता है।
राष्ट्रव्यापी अभियान का हिस्सा
यह कार्यक्रम अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 की तैयारी के तहत आयोजित राष्ट्रव्यापी गतिविधियों का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य योग के प्रति जागरूकता बढ़ाना और लोगों को शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के लिए इसे अपनाने के लिए प्रेरित करना है।
