इंडियाएआई मिशन के तहत सुरक्षित और जिम्मेदार एआई को बढ़ावा, 13 परियोजनाओं को मंजूरी

इंडियाएआई मिशन के तहत सुरक्षित और जिम्मेदार एआई को बढ़ावा, 13 परियोजनाओं को मंजूरी

केंद्र सरकार ने कहा है कि इंडियाएआई मिशन का “सुरक्षित और विश्वसनीय एआई” स्तंभ देश में जिम्मेदार, सुरक्षित और भरोसेमंद कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के विकास को बढ़ावा दे रहा है। सरकार के अनुसार, इस पहल के तहत अब तक 13 जिम्मेदार एआई परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, 58 एआई उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं और 27 डेटा एवं एआई लैब संचालित हो रही हैं। यह जानकारी केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 24 जुलाई को राज्यसभा में दी।

10,371 करोड़ रुपए के बजट वाला इंडियाएआई मिशन

सरकार ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रौद्योगिकी के लोकतंत्रीकरण के दृष्टिकोण पर आधारित इंडियाएआई मिशन को मार्च 2024 में मंजूरी दी गई थी। पांच वर्षों के लिए 10,371 करोड़ रुपए के बजट वाले इस मिशन का उद्देश्य एआई से जुड़े जोखिमों का समाधान करते हुए युवाओं के लिए आर्थिक अवसर और रोजगार सृजित करना है। मिशन के सात प्रमुख स्तंभों में कंप्यूट, फाउंडेशन मॉडल, एआईकोश, एप्लिकेशन डेवलपमेंट, फ्यूचरस्किल्स, स्टार्टअप फाइनेंसिंग तथा सुरक्षित एवं विश्वसनीय एआई शामिल हैं।

स्वदेशी एआई मॉडल के विकास को बढ़ावा

सरकार के अनुसार, अब तक 20 स्वदेशी एआई मॉडल प्रस्तावों की पहचान की गई है, जिनमें 12 लार्ज लैंग्वेज मॉडल (एलएलएम) और 8 स्मॉल लैंग्वेज मॉडल (एसएलएम) शामिल हैं। इनमें सर्वम एआई के 30 बिलियन और 105 बिलियन पैरामीटर मॉडल, ज्ञानी एआई का स्पीच-टू-स्पीच मॉडल, भारतजेन का बहुभाषी फाउंडेशन मॉडल और अवतार एआई का वीडियो जेनरेशन मॉडल प्रमुख हैं। स्वास्थ्य, भाषा प्रौद्योगिकी और एजेंटिक एआई से जुड़े कई विशेष मॉडल भी विकास के विभिन्न चरणों में हैं।

कंप्यूटिंग क्षमता और नवाचार को मिला बढ़ावा

मिशन के तहत 15 कंप्यूट सेवा प्रदाताओं को सूचीबद्ध किया गया है। अब तक 237 परियोजनाओं को समर्थन दिया जा चुका है और 93 लाख जीपीयू घंटे मंजूर किए गए हैं। साथ ही 12 राष्ट्रीय हैकाथॉन एवं इनोवेशन चैलेंज शुरू किए गए हैं, जिनके माध्यम से 62 एआई प्रोटोटाइप और 20 एआई समाधानों के विकास को सहयोग मिला है।

कौशल विकास और एआई लैब्स का विस्तार

सरकार ने बताया कि 178 संस्थानों में स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी कार्यक्रमों के तहत 686 फैलोशिप प्रदान की गई हैं। “युवा एआई फॉर ऑल” कार्यक्रम को 26 लाख से अधिक लोग पूरा कर चुके हैं। देश में स्थापित 27 डेटा एवं एआई लैब्स ने 2,500 से अधिक छात्रों को प्रशिक्षण दिया है, जबकि 188 अतिरिक्त प्रयोगशालाओं पर काम जारी है।

जिम्मेदार एआई के लिए 13 परियोजनाओं को मंजूरी

सुरक्षित एवं विश्वसनीय एआई स्तंभ के तहत 13 जिम्मेदार एआई परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इनमें पूर्वाग्रह निवारण, मशीन अनलर्निंग, गोपनीयता-संरक्षित एआई, व्याख्यात्मकता, डीपफेक पहचान और एआई जोखिम मूल्यांकन जैसे क्षेत्रों पर काम किया जा रहा है।

सरकार ने बताया कि आईआईटी जोधपुर, आईआईटी मद्रास और ‘साक्ष्य’ द्वारा डीपफेक पहचान के लिए मल्टी-एजेंट फ्रेमवर्क विकसित किया जा रहा है। आईआईटी खड़गपुर रियल-टाइम वॉयस डीपफेक डिटेक्शन सिस्टम पर काम कर रहा है, जबकि एनआईटी रायपुर स्वास्थ्य सेवाओं में एआई पूर्वाग्रह कम करने के लिए एल्गोरिदम विकसित कर रहा है। आईआईटी दिल्ली, आईआईटी धारवाड़ और डीआईएटी गोपनीयता-संरक्षित एवं व्याख्यात्मक एआई मॉडल पर कार्य कर रहे हैं।

एआई सुरक्षा संस्थान की स्थापना

सरकार ने बताया कि जनवरी 2025 में इंडियाएआई सुरक्षा संस्थान की घोषणा की गई थी, जिसका उद्देश्य एआई सुरक्षा, संरक्षा और भरोसेमंद उपयोग को बढ़ावा देना है। यह संस्थान शिक्षा जगत, उद्योग, स्टार्टअप और सरकारी निकायों के सहयोग से कार्य करता है तथा सुरक्षित एवं विश्वसनीय एआई से जुड़ी चयनित परियोजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी भी करता है।

वैश्विक एआई शासन में भारत की सक्रिय भूमिका

सरकार के अनुसार, भारत ग्लोबल पार्टनरशिप ऑन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (जीपीएआई), जी20 और संयुक्त राष्ट्र जैसे मंचों पर एआई शासन से जुड़े वैश्विक मानकों को आकार देने में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। नई दिल्ली में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान फ्रंटियर एआई के सुरक्षित विकास, एआई गवर्नेंस मार्गदर्शन और ट्रस्टेड एआई कॉमन्स जैसी महत्वपूर्ण पहलों को आगे बढ़ाया गया। (इनपुट: पीआईबी)