एफटीए समझौतों से भारतीय उत्पादों को वैश्विक बाजारों में मिली नई पहचान: सरकार

एफटीए समझौतों से भारतीय उत्पादों को वैश्विक बाजारों में मिली नई पहचान: सरकार

भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में 863.1 अरब डॉलर का अब तक का सर्वाधिक निर्यात दर्ज किया है। सरकार ने मंगलवार को संसद में बताया कि विभिन्न मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) ने भारतीय निर्यातकों को वैश्विक बाजारों तक बेहतर पहुंच दिलाने, निर्यात में विविधता बढ़ाने और श्रम-प्रधान क्षेत्रों को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

वस्तु और सेवा निर्यात, दोनों ने बनाया नया रिकॉर्ड

लोकसभा में लिखित जवाब में वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट 441.8 अरब डॉलर रहा, जबकि सेवा निर्यात बढ़कर 421.3 अरब डॉलर पहुंच गया। उन्होंने कहा कि वस्तु और सेवा निर्यात के संयुक्त प्रदर्शन से भारत का कुल निर्यात रिकॉर्ड 863.1 अरब डॉलर तक पहुंचा।

एफटीए के लाभ की लगातार हो रही निगरानी

मंत्री ने कहा कि सरकार वर्ष 2021 के बाद लागू हुए व्यापार समझौतों के तहत मिलने वाली शुल्क रियायतों के उपयोग की नियमित निगरानी करती है। इसके लिए सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन और साझेदार देशों के व्यापार आंकड़ों का विश्लेषण किया जाता है।

यूएई के साथ व्यापार में बढ़ी निर्यात विविधता

भारत-यूएई व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (सीईपीए) 1 मई 2022 से लागू होने के बाद अब तक 4.45 लाख सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन जारी किए जा चुके हैं। वित्त वर्ष 2021-22 में यूएई को निर्यात होने वाली एचएस 8-डिजिट टैरिफ लाइनों की संख्या 7,546 थी, जो वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 8,053 हो गई। इन टैरिफ लाइनों के तहत 37.3 अरब डॉलर का निर्यात हुआ। यह 507 नई टैरिफ लाइनों यानी 6.7% की वृद्धि को दर्शाता है।

ऑस्ट्रेलिया समझौते से बढ़ा निर्यात

भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक सहयोग एवं व्यापार समझौते (ईसीटीए) के तहत अब तक 2.73 लाख सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन जारी किए गए हैं। समझौते से पहले वित्त वर्ष 2020-21 में केवल 1,482 सर्टिफिकेट जारी हुए थे, जबकि समझौते के लागू होने के बाद हर वर्ष औसतन 45,527 सर्टिफिकेट जारी किए जा रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया को निर्यात होने वाली एचएस 8-डिजिट टैरिफ लाइनों की संख्या वित्त वर्ष 2021-22 के 5,396 से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 5,668 हो गई। इन टैरिफ लाइनों के तहत 7.2 अरब डॉलर का निर्यात हुआ, जिससे 272 नई टैरिफ लाइनों के जरिए भारतीय उत्पादों को अतिरिक्त बाजार मिला।

मॉरीशस के साथ भी बढ़ा व्यापार

भारत-मॉरीशस व्यापक आर्थिक सहयोग एवं साझेदारी समझौते (सीईसीपीए) के तहत भारतीय निर्यातकों ने अब तक 1,956 सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन का लाभ उठाया है। मॉरीशस को निर्यात होने वाली टैरिफ लाइनों की संख्या वित्त वर्ष 2021-22 के 3,593 से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 4,345 हो गई। इन टैरिफ लाइनों के तहत करीब 473 मिलियन डॉलर का निर्यात हुआ। यह 752 नई टैरिफ लाइनों यानी 20.9% की वृद्धि को दर्शाता है।

ओमान समझौते से शुल्क मुक्त पहुंच का लाभ

मंत्री ने बताया कि भारत-ओमान व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) के तहत मूल्य के आधार पर भारत के 99.38% निर्यात को शुल्क मुक्त पहुंच मिली है, जो ओमान की 98.08% टैरिफ लाइनों को कवर करती है। 1 जून 2026 से लागू इस समझौते के बाद अब तक 783 सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन जारी किए गए हैं। ओमान को निर्यात होने वाली टैरिफ लाइनों की संख्या मई 2026 के 2,879 से बढ़कर जून 2026 में 3,371 हो गई। जून 2026 में इन टैरिफ लाइनों के तहत 622.8 मिलियन डॉलर का निर्यात हुआ, जो मई 2026 की तुलना में 54.7% और जून 2025 की तुलना में 189.6% अधिक रहा।

ईएफटीए समझौते का भी मिला लाभ

यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए)-टीईपीए के तहत भारत को 92.2% टैरिफ लाइनों पर रियायत मिली है, जो भारत के 99.6% निर्यात को कवर करती है। अक्टूबर 2025 से समझौता लागू होने के बाद अब तक 7,885 सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन जारी किए जा चुके हैं, जो शुल्क रियायतों के प्रभावी उपयोग को दर्शाते हैं।

श्रम-प्रधान उद्योगों को मिली प्राथमिकता

जितिन प्रसाद ने कहा कि हाल के वर्षों में भारत द्वारा किए गए एफटीए समझौतों में टेक्सटाइल, चमड़ा और अन्य श्रम-प्रधान उद्योगों को विशेष प्राथमिकता दी गई है। यूएई, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, ओमान, न्यूजीलैंड और ईएफटीए के साथ हुए समझौतों से भारतीय उत्पादों को नए बाजार मिले हैं। साथ ही, संवेदनशील घरेलू क्षेत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए संतुलित रणनीति अपनाई गई है। (इनपुट: आईएएनएस)