
नीति थिंक-टैंक ब्रॉडबैंड इंडिया फोरम (बीआईएफ) ने बुधवार को भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (टीआरएआई) के उस दृष्टिकोण का स्वागत किया, जिसमें पब्लिक वाई-फाई को सस्ती और सर्वसुलभ ब्रॉडबैंड सेवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण पूरक इंफ्रास्ट्रक्चर के रूप में औपचारिक मान्यता दी गई है।
ट्राई के परामर्श पत्र के जवाब में बीआईएफ ने कहा
सार्वजनिक वाई-फाई नेटवर्क के विस्तार पर ट्राई के परामर्श पत्र (कंसल्टेशन पेपर) के जवाब में बीआईएफ ने कहा कि भारत की भविष्य की डिजिटल महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए केवल मोबाइल नेटवर्क पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं हो सकता। फोरम के अनुसार, पब्लिक वाई-फाई इंटरनेट सेवाओं को अधिक किफायती बना सकता है, इनडोर कनेक्टिविटी को बेहतर कर सकता है, स्पेक्ट्रम की दक्षता बढ़ा सकता है और मोबाइल नेटवर्क पर बढ़ते ट्रैफिक का बोझ कम कर सकता है।
बीआईएफ ने ट्राई से आग्रह किया
बीआईएफ ने ट्राई से आग्रह किया कि वह एक व्यापक राष्ट्रीय रणनीति की सिफारिश करे, जिसमें बुनियादी ढांचे का विस्तार, बड़े स्तर पर इकोसिस्टम का विकास, तकनीकी आधुनिकीकरण, उपयोगकर्ताओं में जागरूकता और अपनाने को बढ़ावा देना शामिल हो। फोरम ने सुझाव दिया कि पीएम-वानी को भारतनेट, राज्य स्तरीय फाइबर नेटवर्क, स्मार्ट सिटी परियोजनाओं और अन्य सार्वजनिक डिजिटल परिसंपत्तियों के साथ जोड़ा जाए, ताकि देशभर में वाई-फाई हॉटस्पॉट की स्थापना तेज हो सके।
बीआईएफ ने उपभोक्ताओं, कारोबारियों और स्थानीय उद्यमियों को पब्लिक वाई-फाई की किफायती लागत, सुरक्षा, विश्वसनीयता और फायदों के बारे में जानकारी देने के लिए देशव्यापी जागरूकता अभियान शुरू करने की सिफारिश की। फोरम ने कहा कि पीएम-वानी को मजबूत करने के लिए कुछ बड़े सुपर पीडीओए (पब्लिक डेटा ऑफिस एग्रीगेटर), स्केलेबल पीडीओए और ऐप प्रदाताओं का मजबूत इकोसिस्टम विकसित किया जाना चाहिए। इससे अलग-अलग हॉटस्पॉट्स को एक विश्वसनीय, इंटरऑपरेबल और निवेश के अनुकूल डिजिटल प्लेटफॉर्म में बदला जा सकेगा।
टीवी रामचंद्रन ने कहा
ब्रॉडबैंड इंडिया फोरम के अध्यक्ष टीवी रामचंद्रन ने कहा कि पब्लिक वाई-फाई देश की सबसे महत्वपूर्ण डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचनाओं में से एक है, जिसमें डिजिटल खाई (डिजिटल डिवाइड) को कम करने की क्षमता है। उन्होंने कहा कि पीएम-वानी ने वर्षों से चले आ रहे नियामकीय प्रतिबंधों को हटाकर भारत के पब्लिक वाई-फाई इकोसिस्टम को खोल दिया है और इसे बड़े स्तर तक पहुंचने का उचित अवसर दिया जाना चाहिए।
रामचंद्रन ने कहा कि ऐसा इकोसिस्टम विकसित किया जाना चाहिए, जहां दूरसंचार सेवा प्रदाता (टीएसपी) और इंटरनेट सेवा प्रदाता (आईएसपी) पब्लिक वाई-फाई को प्रतिस्पर्धी सेवा नहीं, बल्कि ब्रॉडबैंड विस्तार के एक पूरक अवसर के रूप में देखें। फोरम ने निर्बाध रोमिंग, ऑथेंटिकेशन और नेटवर्क खोज (डिस्कवरी) के लिए खुले इंटरऑपरेबिलिटी मानक विकसित करने की भी सिफारिश की, ताकि वाई-फाई का उपयोग मोबाइल ब्रॉडबैंड जितना आसान और सहज बन सके।
इसके साथ ही, वाई-फाई 6ई और वाई-फाई 7 जैसी अगली पीढ़ी की तकनीकों के लिए राष्ट्रीय रोडमैप तैयार करने का सुझाव दिया गया। इसके लिए सस्ते उपकरणों की उपलब्धता, घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहन और इमारतों को तकनीकी रूप से तैयार करने की व्यवस्था भी जरूरी बताई गई।
दूरदराज और कम विकसित क्षेत्रों में पब्लिक वाई-फाई के विस्तार पर ध्यान दिया जाना चाहिए
बीआईएफ ने कहा कि जहां बाजार-आधारित सेवाएं उपलब्ध नहीं हैं या पर्याप्त नहीं हैं, वहां सार्वजनिक वित्तपोषण (पब्लिक फंडिंग) का उपयोग किया जा सकता है। विशेष रूप से दूरदराज और कम विकसित क्षेत्रों में पब्लिक वाई-फाई के विस्तार पर ध्यान दिया जाना चाहिए। फोरम ने यह भी सुझाव दिया कि नगर निकायों और स्थानीय प्रशासन की भूमिका केवल अनुमति देने तक सीमित न रहे, बल्कि वे डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने में सक्रिय भागीदार बनें। (इनपुट-आईएएनएस)

