पीएम नरेन्द्र मोदी स्वीडन पहुंचे, पीएम उल्फ क्रिस्टर्सन के साथ होगी द्विपक्षीय वार्ता

पीएम नरेन्द्र मोदी स्वीडन पहुंचे, पीएम उल्फ क्रिस्टर्सन के साथ होगी द्विपक्षीय वार्ता

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नीदरलैंड और संयुक्त अरब अमीरात की यात्राओं के बाद रविवार को स्वीडन के गोथेनबर्ग पहुंचे। यह उनकी पांच देशों की यूरोप यात्रा का तीसरा चरण है। एयरपोर्ट पर स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।

स्वीडन एयरस्पेस में ग्रिपेन फाइटर जेट्स ने दी एस्कॉर्ट

पीएम मोदी के आगमन को विशेष महत्व देते हुए स्वीडन के ग्रिपेन फाइटर जेट्स ने उनके विमान को स्वीडिश एयरस्पेस में एस्कॉर्ट किया। यह भारत और स्वीडन के बीच बढ़ते रणनीतिक और कूटनीतिक संबंधों का प्रतीक माना जा रहा है।

UAE और नीदरलैंड यात्रा के बाद स्वीडन पहुंचे पीएम मोदी

प्रधानमंत्री मोदी इससे पहले संयुक्त अरब अमीरात और नीदरलैंड में कई उच्चस्तरीय बैठकों में शामिल हुए। इन दौरों के बाद वे सीधे स्वीडन पहुंचे, जहां उनकी दो दिवसीय (17–18 मई) आधिकारिक यात्रा प्रस्तावित है।

व्यापार, तकनीक और हरित ऊर्जा पर फोकस

इस यात्रा का उद्देश्य भारत और स्वीडन के बीच सहयोग को नई दिशा देना है। दोनों देशों के बीच व्यापार, तकनीक, ग्रीन ट्रांजिशन, स्टार्टअप, और उभरते क्षेत्रों में साझेदारी को और मजबूत करने पर जोर रहेगा।

भारत–स्वीडन संबंधों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत ने वर्ष 2018 में पहली भारत–नॉर्डिक शिखर बैठक के दौरान स्वीडन की यात्रा की थी। विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह यात्रा दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक सहयोग को और गहरा करने का अवसर प्रदान करेगी।

उच्चस्तरीय वार्ता में कई अहम मुद्दों पर चर्चा

प्रधानमंत्री मोदी और स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन के बीच होने वाली वार्ता में भारत–स्वीडन संबंधों के सभी पहलुओं की समीक्षा की जाएगी। इसमें रक्षा उत्पादन, अंतरिक्ष सहयोग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जलवायु परिवर्तन, स्टार्टअप इकोसिस्टम और आपूर्ति श्रृंखला जैसे विषय शामिल होंगे।

बढ़ता व्यापार और निवेश

विदेश मंत्रालय के अनुसार, वर्ष 2025 में भारत–स्वीडन के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 7.75 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। वहीं, वर्ष 2000 से 2025 के बीच स्वीडन से भारत में 2.825 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) हुआ है।

भविष्य के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की तैयारी

दोनों देश अब नवाचार-आधारित अर्थव्यवस्था, स्वच्छ ऊर्जा, डिजिटल टेक्नोलॉजी और रक्षा निर्माण जैसे भविष्य के क्षेत्रों में रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं। इस यात्रा से भारत–स्वीडन संबंधों को नई गति मिलने की उम्मीद है।