
गोवा के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत ने गोवा के अंतरराष्ट्रीय फिल्म निर्माण गंतव्य के रूप में बढ़ते कद पर प्रकाश डालते हुए कहा, “गोवा विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे के साथ तैयार है और यही कारण है कि यह इफ्फी का स्थायी स्थान बन गया है। हमारी प्राकृतिक सुंदरता फिल्म निर्माताओं को आकर्षित करती है, लेकिन हमारे मजबूत नीतिगत सुधार ही उन्हें बार-बार यहां वापस लाते हैं।”
कल गुरुवार को 56वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफआई 2025) का उद्घाटन किया। इस दौरान सीएम सावंत ने कहा कि इफ्फी-2025 “क्रिएटिविटी और टेक्नोलॉजी का मेल” थीम पर मनाया जा रहा है, जो ग्लोबल क्रिएटिव क्रांति में भारत की लीडरशिप को दिखाता है। इफ्फी भारतीय प्रतिभा को वैश्विक संभावनाओं से जोड़ता है। हमारा सपना गोवा को भारत की ‘रचनात्मक राजधानी’ बनाना है। गोवा आएं, अपनी कहानियां सुनाएं, अपनी फिल्में शूट करें।”
उन्होंने भारतीय सिनेमा को अभूतपूर्व अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने और भारत को कहानी कहने की दुनिया में एक उभरती हुई सॉफ्ट पावर बनाने का श्रेय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दृष्टिकोण को दिया।
वहीं, महोत्सव का उद्घाटन करते हुए, गोवा के राज्यपाल पुसापति अशोक गजपति राजू ने इफ्फी के बढ़ते वैश्विक कद की प्रशंसा की। उन्होंने कहा, “इफ्फी रचनात्मक आदान-प्रदान, नए सहयोग और सिनेमाई उत्कृष्टता के उत्सव के लिए एक सार्थक मंच बन गया है। गोवा के कॉस्मोपॉलिटन कैरेक्टर, सांस्कृतिक समृद्धि और ग्लोबल कनेक्टिविटी को देखते हुए, यह स्वाभाविक है कि फिल्म प्रेमी इतनी बड़ी संख्या में यहां एकत्र होते हैं।”
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इफ्फी ने हमेशा एक पारंपरिक फिल्म महोत्सव की सीमाओं से आगे बढ़ा है। उन्होंने कहा कि यह महोत्सव दुनिया भर के विचारों, कहानियों और क्रिएटिव माइंड्स के लिए एक संगम स्थल के रूप में कार्य करता है। इफ्फी युवा फिल्म निर्माताओं का सहयोग करता है, सिनेमाई प्रतिभा को सम्मानित करता है और फिल्म तथा रचनात्मक उद्योगों के वैश्विक केंद्र के रूप में भारत की स्थिति को मजबूत करता है।
सभा को संबोधित करते हुए, केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री, डॉ. एल. मुरुगन ने कहा कि इफ्फी हर संस्करण के साथ बेहतर होता जा रहा है। उन्होंने कहा, “पारंपरिक रूप से, महोत्सव की शुरुआत श्यामा प्रसाद मुखर्जी स्टेडियम में हुआ करती थी। लेकिन इस साल, यह एक भव्य सांस्कृतिक कार्निवल के रूप में शुरू हुआ है, जो हमारे राज्यों की विविध परंपराओं को प्रदर्शित कर रहा है।”
उन्होंने प्रधानमंत्री के भारत की बढ़ती ऑरेंज इकॉनमी के विज़न को याद किया, जो कंटेंट, क्रिएटिविटी और कल्चर से चलेगी। उन्होंने बताया कि मुंबई में आयोजित विश्व ऑडियो विजुअल एंड एंटरटेनमेंट शिखर सम्मेलन (वेव्स) जैसी पहलें देश भर की उभरती रचनात्मक प्रतिभाओं को सशक्त बना रही हैं। उन्होंने दिवंगत मनोहर पर्रिकर को श्रद्धांजलि अर्पित की और गोवा को इफ्फी का स्थायी स्थान बनाने में उनकी अहम भूमिका को भी याद किया।
वहीं, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव, संजय जाजू, ने इस वर्ष के संस्करण की अनूठी विशेषताओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने उल्लेख किया, “पहली बार, इफ्फी का उद्घाटन भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का उत्सव मनाते हुए एक भव्य कार्निवल के साथ हो रहा है। इस एडिशन में फिल्मों का अब तक का सबसे बड़ा कलेक्शन दिखाया जा रहा है-जो लगभग 80 देशों को दिखाता है-साथ ही कई इंटरनेशनल और ग्लोबल प्रीमियर भी होंगे।”
