
लोकसभा में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ और परिसीमन को लेकर हुई चर्चा का जवाब देते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि महिला आरक्षण को 2029 से पहले लागू किया जाएगा। उन्होंने विपक्ष पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह देश की महिलाओं के अधिकारों से जुड़ा महत्वपूर्ण सुधार है।
2029 से पहले लागू होगा आरक्षण
गृह मंत्री ने कहा कि कुछ राजनीतिक दल महिला आरक्षण को 2029 के बाद तक टालने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन सरकार ऐसा नहीं होने देगी। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे इस बिल का समर्थन करें, क्योंकि देश की महिलाएं इस पर नजर बनाए हुए हैं।
धर्म आधारित आरक्षण पर स्पष्ट रुख
अमित शाह ने कहा कि भारतीय संविधान धर्म के आधार पर आरक्षण की अनुमति नहीं देता है। उन्होंने विपक्ष पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि मुस्लिम आरक्षण की मांग संवैधानिक प्रावधानों के खिलाफ है।
महिलाओं से सीधा संदेश
गृह मंत्री ने कहा कि देश की महिलाओं को यह समझना होगा कि उनके अधिकारों में कौन बाधा बन रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि संसद इस ऐतिहासिक अवसर का लाभ उठाते हुए महिला आरक्षण को लागू करने का मार्ग प्रशस्त करेगी।
परिसीमन और जनगणना का संबंध
अमित शाह ने स्पष्ट किया कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम में प्रावधान है कि 2026 के बाद होने वाली जनगणना के आधार पर परिसीमन किया जाएगा और उसी में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू होगा। उन्होंने बताया कि यह व्यवस्था नई नहीं है, बल्कि 1971 के बाद सीटों के फ्रीज होने से जुड़ी प्रक्रिया का हिस्सा है।
इतिहास का हवाला
गृह मंत्री ने कहा कि 1972 में इंदिरा गांधी सरकार ने सीटों की संख्या बढ़ाई और 1976 में 42वें संशोधन के जरिए परिसीमन पर रोक लगा दी गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि तब भी कांग्रेस ने परिसीमन को रोका था और आज भी वही रुख अपनाया जा रहा है।
जनगणना में देरी की वजह
उन्होंने बताया कि 2021 में होने वाली जनगणना कोविड-19 महामारी के कारण संभव नहीं हो पाई। बाद में विभिन्न दलों और सामाजिक समूहों से चर्चा के बाद जाति आधारित जनगणना कराने का निर्णय लिया गया, जो अब शुरू हो चुकी है।
उत्तर-दक्षिण विभाजन की राजनीति पर टिप्पणी
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश को उत्तर और दक्षिण के आधार पर बांटने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि सभी राज्यों का संसद पर समान अधिकार है और इस तरह का नैरेटिव देशहित में नहीं है।
सीटों के आंकड़ों से दिया जवाब
अमित शाह ने दक्षिण भारत के पांच राज्यों—कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और केरल—का उदाहरण देते हुए कहा कि परिसीमन के बाद भी उनका प्रतिनिधित्व प्रभावित नहीं होगा। उन्होंने बताया कि इन राज्यों की सीटें 129 से बढ़कर 195 हो जाएंगी और प्रतिशत में भी मामूली बढ़ोतरी होगी, जिससे यह स्पष्ट है कि किसी क्षेत्र का नुकसान नहीं होगा।
ओबीसी प्रतिनिधित्व का जिक्र
उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार में 27 मंत्री ओबीसी समुदाय से हैं, जो कुल संख्या का लगभग 40% है। साथ ही, ओबीसी आयोग को संवैधानिक दर्जा देने और राज्यों को सूची में संशोधन का अधिकार देने जैसे कदम भी उठाए गए हैं।

