
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच हुए समझौते दोनों देशों के संबंधों को और अधिक मजबूती देंगे। प्रधानमंत्री की यूएई यात्रा के दौरान ऊर्जा, रक्षा, तकनीक, बुनियादी ढांचे और निवेश से जुड़े सात महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए।
पीएम मोदी ने समझौतों को बताया महत्वपूर्ण
नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए कहा कि ये समझौते भारत-यूएई रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती देंगे। उन्होंने कहा, “ये महत्वपूर्ण समझौते भारत-यूएई मित्रता को और मजबूत करेंगे।”
ऊर्जा सुरक्षा को मिलेगा बल
दोनों देशों के बीच सबसे महत्वपूर्ण समझौतों में इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स लिमिटेड और अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी के बीच रणनीतिक सहयोग समझौता शामिल है। इस समझौते का उद्देश्य भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना और रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार का विस्तार करना है। इससे एलएनजी और एलपीजी बुनियादी ढांचे में भी सहयोग के नए अवसर पैदा होंगे।
इसके अलावा दोनों देशों ने दीर्घकालिक एलपीजी आपूर्ति को लेकर भी समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिससे वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच भारत की ऊर्जा जरूरतों को स्थिरता मिलेगी।
रक्षा और समुद्री सहयोग को नई दिशा
भारत और यूएई ने रणनीतिक रक्षा साझेदारी के लिए एक नए ढांचे पर भी सहमति जताई। इसके तहत रक्षा निर्माण, सैन्य प्रशिक्षण, समुद्री सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, नवाचार और सुरक्षित संचार प्रणालियों में सहयोग बढ़ाया जाएगा।
वाडिनार में विकसित होगा समुद्री क्लस्टर
गुजरात के वाडिनार में जहाज मरम्मत और समुद्री बुनियादी ढांचा क्लस्टर विकसित करने की परियोजना पर भी सहमति बनी। यह पहल “मेक इन इंडिया” अभियान को मजबूती देने के साथ भारत को वैश्विक समुद्री केंद्र के रूप में विकसित करने में मदद करेगी। इसके साथ ही जहाज मरम्मत क्षेत्र में कौशल विकास को लेकर भी समझौता हुआ है, जिससे भारतीय समुद्री कार्यबल की क्षमता बढ़ेगी।
सुपरकंप्यूटर क्लस्टर स्थापित करने पर सहमति
तकनीकी क्षेत्र में भारत के सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस कंप्यूटिंग और यूएई की जी42 के बीच आठ एक्सफ्लॉप सुपरकंप्यूटर क्लस्टर स्थापित करने पर सहमति बनी। यह परियोजना उन्नत कंप्यूटिंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित अनुसंधान को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाएगी।
यूएई ने किया 5 अरब डॉलर निवेश का ऐलान
यूएई ने भारत के बुनियादी ढांचा और वित्तीय संस्थानों में 5 अरब डॉलर निवेश की घोषणा भी की है। विशेषज्ञों के अनुसार, इससे दोनों देशों के आर्थिक संबंध और मजबूत होंगे तथा भारत में बुनियादी ढांचा विकास को नई गति मिलेगी।

